माँ मै कलेक्टर बन गया…IAS राजेश पाटील की प्रेरणादायक कहानी का आधार है मां और उनका गिरवी घर

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हर IAS ऑफिसर की अपनी एक सक्सेस स्टोरी होती है। हर आईएएस अधिकारी काफी कड़ी मेहनत और परिश्रम के दम पर यह मुकाम हासिल करता है। आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे IAS अधिकारी की, जिन्होंने ब्रेड बेचने से लेकर आईएएस अधिकारी बनने तक का सफर तय किया और उन्होंने अपने इस पूरे सफर का जिक्र अपनी किताब मां मैं कलेक्टर बन गया में किया है। उनकी यह किताब काफी प्रचलित है।

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गिरवी रखना पड़ा था घर

किताब के लेखक खुद आईएएस अधिकारी राजेश प्रभाकर पाटील ही है। उन्होंने अपनी इस किताब में अपने आईएएस अधिकारी बनने के पूरे सफर को बयां किया है। मालूम हो कि राजेश पाटिल साल 2005 के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने अपने इस सफर को तय करने के लिए कड़ा परिश्रम किया है। उनके उस सपने को पूरा करने के लिए परिवार को घर तक गिरवी रखना पड़ा था।

Shalinitai Patil video screenshot

ब्रेड बेचने तक का किया काम

राजेश पाटील ने बताया कि स्कूल के दिनों में वह ब्रेड बेचने तक का काम किया करते थे। राजेश ने यूपीएससी रिजल्ट घोषित होने पर अंतिम सूची में अपना नाम ढूंढने के बाद अपनी मां को सबसे पहले फोन किया और कहा- मां मैं एक कलेक्टर बन गया। यही उन्होंने अपनी किताब का शीर्षक भी रखा।

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किताब में लिखा सफरनामा

बता दे राजेश पाटिल ने यह किताब मराठी में लिखी है। इस किताब के 224 पन्नों में उन्होंने अपने सफर का जिक्र किया है। द बेटर इंडिया को दिए गए अपने इंटरव्यू में राजेश पाटिल ने अपनी किताब के कुछ पन्नों के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि जब मैं छोटा बच्चा था तो मैं अक्सर अपनी मां को कलेक्टर की मां कहता था। मेरे दिल में मुझे पता था कि एक दिन यह शब्द मैं सच करके दिखाऊंगा।

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बचपन में थे बेहद शरारती

वहीं दूसरी ओर अपने माता-पिता के कंधों पर भार कम करने के लिए मैंने स्नातक की पढ़ाई करने के दौरान कृषि श्रम करने के साथ-साथ ब्रेड और सब्जियां बेचने का काम भी किया। आगे उन्होंने बताया कि बचपन में मैं काफी शरारती था। ऐसे में अक्सर मेरे माता-पिता को मेरे भविष्य की चिंता भी रहती थी। मैं पढ़ाई में भी शुरूआत से खासा अच्छा नहीं था।

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साल 2005 में पूरा हुआ सपना

ऐसे हालातों में मेरे दोस्तों और शिक्षकों ने मेरी पढ़ाई के मामले में काफी मदद की, जिसके बाद यह एहसास हुआ कि जिंदगी में कुछ करना है और अपनी जिंदगी में एक मुकाम हासिल करना है। इसी दृढ़ निश्चय के साथ उन्होंने अपने आईएएस अधिकारी बनने का सफर शुरू किया और कड़ी मेहनत और परिश्रम के नाम पर साल 2005 में उन्होंने अपना सपना पूरा कर लिया।

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साल 2005 के यूपीएससी रिजल्ट में उनका भी नाम शुमार था। ऐसे में वह आईएएस अधिकारी बन गए तो उन्होंने यह खुशखबरी सबसे पहले फोन करके अपनी मां को दी। उन्होंने फेन पर मा से कहा- माँ मैं कलेक्टर बन गया…

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