मोती की खेती ने बदल दी नरेंद्र गरवा की जिंदगी, सालाना कमा रहे हैं 5 लाख

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Success Story of Rajasthan's pearl farmer Narendra Garva
Success Story of Rajasthan's pearl farmer Narendra Garva

राजस्थान, जहां आज देश के बड़े-बड़े किसान खेती से मुंह मोड़ कर अच्छे मुनाफे के लिए कोई और काम की खोज कर रहे हैं। वहीं जिन किसानों को ये लगता है कि खेती-किसानी में अब कुछ नहीं रखा। उन्हें राजस्थान के रेनवाल में रहने वाले नरेंद्र कुमार गरवा से मिलना चाहिए और उनके बारे में जानना चाहिए। एक आम परिवार से आने वाले नरेंद्र कुमार गरवा कभी किताबें बेचा करते थे, लेकिन इतनी मेहनत के बाद भी उनको तरक्की नहीं मिल पा रही थी, तो उन्होंने अपना कुछ नया करने का सोचा।

Rajasthan's pearl farmer Narendra Kumar Garva
Rajasthan’s pearl farmer Narendra Kumar Garva

नरेंद्र कुमार गरवा ने इसको लेकर कई लोगों से बात की। इसके साथ ही उन्होंने गूगल और यूट्यूप जैसे कई प्लेटफॉर्म पर कई विकल्प ढूंढने फिर उनकी नजर मोती की खेती पर पड़ी। नरेंद्र कुमार गरवा ने इस बारे में और जानकारी निकाली और इसके बाद उन्हें पता चला कि राजस्थान में कम ही लोग हैं, जो मोती की खेती के काम पर हैं। फिर क्या था नरेंद्र कुमार गरवा भी निकल पड़े मोती की खेती करने में जुट गए।

नरेंद्र कुमार गरवा ने अपने घर की छत पर बागवानी शुरू कर दी, लेकिन उनके लिए आसान काम नहीं था उनके आसा-पास के लोग उनका मजाक उड़ाने लगे। कहने लगे कि इसका दिमाग खराब हो गया है। यहां तक कि उनके परिवार के लोगों ने भी उन्हें पागल कहना शुरू कर दिया था। मगर यह नरेंद्र कुमार गरवा का जुनून ही था कि मोती की खेती ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। मौजूदा समय में वो 5 लाख रुपए तक की कमाई कर रहे हैं और रेनवाल की पहचान बन चुके हैं।

Narendra Garva doing pearl farming
Narendra Garva doing pearl farming

नरेंद्र अपने इस सफलता के सफर के बारे में बात करते हुए बताया था कि उन्होंने करीब चार साल पहले सीप की खेती करने का निश्चिय कर लिया था। शुरुआत में उन्हें नहीं पता था कि वो इसे कैसे शुरू करेंगे। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि ओडिशा में CIFA यानि सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर (ICAR के तहत एक नया विंग) नामक एक संस्थान है, जो सीप की खेती का हुनर सिखाता है।

नरेंद्र कुमार गरवा बताते हैं कि उनको सीप की खेती के बारे में उतना ही पता था, जितना उन्होंने पढ़ा था या फिर उन्हें लोगों ने बताया था। यही कारण रहा कि उन्होंने खेती की शुरुआत करने से पहले प्रशिक्षण लेना जरूरी समझा और सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर (CIFA) के मुख्यालय पहुंच गए, जोकि उड़ीसा में है। वहां से लौटने के बाद नरेंद्र ने 30-35 हजार रुपए की छोटी सी रकम के साथ सीप से मोती बनाने की अपनी इकाई शुरू की।

Former Agriculture Minister Prabhu Lal Saini and former Rajasthan Chief Minister Vasundhara Raje appreciate his work
Former Agriculture Minister Prabhu Lal Saini and former Rajasthan Chief Minister Vasundhara Raje appreciate his work

वहीं फिलहाल नरेंद्र 300 गज के एक प्लाट में अपना काम कर रहे हैं। नरेंद्र आगे बताते हैं कि उन्होंने अपने प्लॉट में छोटे-छोटे तालाब बना रखे हैं, जिनके अंदर वो मुम्बई, गुजरात और केरल के मछुआरों से खरीदकर लाए गए सीप को रखते हैं। अच्छी खेती के लिए वो करीब एक हजार सीप एक साथ रखते हैं। फलस्वरूप उन्हें साल-डेढ़ के अंदर डिजाइनर और गोल मोती मिल जाते हैं।

नरेंद्र कहते हैं कि हर साल करीब 20 प्रतिशत सीप खराब हो जाते हैं। मगर, अच्छी तकनीक के कारण उन्हें अच्छी गुणवत्ता के मोती मिल जाते हैं, जिससे उनके सारे नुकसान की भरपाई हो जाती है। उनके अनुसार वो छोटी सी जगह में यह काम कर रहे, तब जाकर हर साल वो करीब 4-5 लाख रुपए की कमाई कर लेते हैं। यही अगर बड़े स्तर पर किया जाए तो कमाई बढ़ सकती है। अच्छे मोतियों की मार्केट में खूब डिमांड है।

Pearl cultivation is scientific, so training is necessary
Pearl cultivation is scientific, so training is necessary

इतना ही नहीं नरेंद्र अपनी एक याद शेयर करते हुए बताते हैं कि उनके जीवन का वो पल सबसे यादगार है, जब पूर्व कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उनके काम को सराहा। इसका लाभ उन्हें आगे भी हुआ, कई मौकों पर उन्हें सरकार से मदद मिलती रही है। आज पूरे इलाके में उन्हें लोग पहचानते हैं। कई सारे युवाओं ने तो उनसे प्रेरित होकर उन्हें अपना मेंटर बना लिया। अब तक नरेन्द्र 100 से अधिक लोगों को सीप से मोती की खेती करने का प्रशिक्षण दे चुके हैं। साथ ही अपने आसपास के लोगों को रोजगार देने का काम कर रहे हैं।

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