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यहां स्थापित है विश्व की दूसरी ऊंची शिव जी की प्रतिमा, लिफ्ट का करना पड़ता है इस्तेमाल

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murudeshwar temple has worlds second highest shiv pratima

भारत वर्ष में शिव जी के अनेको मंदिर और उन मंदिरों की महिमा बहुत ही निराली है। सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा का दिन होता है। बहुत से लोग इस दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए व्रत भी करते हैं और सुबह के समय शिवलिंग का पूजन भी करते हैं। क्योंकि शिव जी को प्रसन्न करना बहुत ही आसान होता है, वे सिर्फ एक लोटे सच्चे मन से चढ़ाने वाले पर भी प्रसन्न हो जाते हैं।

कहते हैं कि जो लोग हर रोज़ मंदिर नहीं जा सकते वे केवल सोमवार के दिन ही भोलेनाथ को प्रसन्न कर लें तो उनका भाग्य खुल जाता है। इसलिए भक्तों की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव नें उन्हें दर्शन दिए और तभी वहां प्रकट शिवलिंग के रुप में मंदिर बना दिए गए। भारत में शिवालयों में एक अनोखा ही चमत्कार देखने को मिलता है।

murudeshwar temple has worlds second highest shiv pratima
Image Source: Social Media

इऩ्हीं मंदिरों में से एक मंदिर कर्नाटक राज्य के भटकल में स्थित है। महादेव का यह मंदिर मुरुदेश्वर (Murudeshwar) नाम से प्रसिद्ध है। मुरुदेश्वर मंदिर (Murudeshwar Temple) का इतिहास रामायण काल का बताया जाता है, कहा जाता है की यहां शिव जी की दूसरी सबसे बड़ी प्रतिमा स्थापित है। यह पवित्र मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जहां भगवान की प्रतिमा 123 फीट ऊंची हैं। तो आइये जानते है थोड़ा विस्तार से।

रामायण काल से जुड़ा है इतिहास

मुरुदेश्वर का इतिहास रामायण काल का है, जो इस जगह को और हिंदुओं के लिए और भी पवित्र बनाता है। बता दें कि यहां विश्व की दूसरी सबसे बड़ी शिव प्रतिमा स्थापित है। जिसके लिए ये स्थान बेहद प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भगवान शिव के दूसरे स्वरूप श्री मृदेसालिंग की पूजा की जाती है। मुरुदेश्वर मंदिर तीन तरफ से घिरा हुआ है, शांत पहाड़ी पर स्थापित मंदिर का नज़ारा बहुत ही मनोरम दिखाई देता है।

murudeshwar temple has worlds second highest shiv pratima
Image Source: Social Media

मुरुदेश्वर मंदिर शांत समुद्र तट से तीन तरफ से घिरा हुआ है, शांत पहाड़ी पर स्थापित मंदिर का नज़ारा बहुत ही मनोरम दिखाई देता है। कर्नाटक राज्य के भटकल में स्थित मुरुदेश्वर हिंदुओं की पवित्र मंदिर के अलावा पर्यटक स्थल भी माना जाता है। घूमने के लिए यहां कुछ बेहद ही खास जगहें भी है।

विश्व की दूसरी ऊंची शिव जी की प्रतिमा

मुरुदेश्वर मंदिर परिसर में भगवान शिव की विशाल मूर्ति है, जो दूर से दिखाई देती है। प्रतिमा की ऊंचाई 123 फीट है और इसे बनाने में लगभग 2 साल लगे। मूर्ति इस तरह तैयार की गई है कि सूर्य का प्रकाश सीधे इस पर पड़े और इस तरह यह बहुत खुबसूरत दिखाई देती है।

मूल रूप से, मूर्ति की चार बाहें है और इसे सोने से सुशोभित किया गया है। हालांकि, अरब सागर से उठने वाले तेज हवाओं के झोंके ने बाहों के रंग को उड़ा दिया और बारिश ने रंग को विघटित कर दिया।

गोपरा आम तौर पर किसी भी हिंदू मंदिर का मुख्य द्वार होता है। राजागोपुरा मुख्यत:20 मंजिला इमारत है, जोकि मुरुदेश्वर मंदिर का प्रवेश द्वार है। श्रद्धालु इस गोपुरा में लिफ्ट का इस्तेमाल कर उपरी मंजिल अपर पहुंचकर मुरुदेश्वर मंदिर और शिव प्रतिमा और मीलों दूर तक फैले समुंद्र को देख सकते हैं।

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