आसिफा का फोन आया- बच्चे भूख से तड़प रहे हैं; CRPF जवानों ने वर्फ पर 12 Km पैदल चल पहुँचाया खाना

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jammu kashmir crpf jawans walk 12 km from the icy road and bring food for hunger family

भारतीय सेना और सुरक्षा बलों की अदम्य बहादुरी के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे। बात चाहे बॉर्डर की हो या देश के अंदर हर जगह हमारे सुरक्षा बलों ने पूरी ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य का पालन करते हुए देश सेवा की है। जवानों के अदम्य साहस की कहानियों से पूरा देश बख़ूबी वाक़िफ़ है। ऐसे क़िस्से कई बार हमारे सामने आए हैं, जहाँ जवानों ने बिना अपनी जान की परवाह किए ज़रूरतमंदों की मदद करके अपने कर्तव्य को पूरी ईमानदारी के साथ पूरा किया।

ऐसा ही एक ताज़ा मामला जम्मू-कश्मीर का है। जिसका जिक्र इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर हो रहा है। कुछ तस्वीर इन दिनों जमकर वायरल हो रही है, जिस पर हिंदुस्तानी जनता के साथ साथ दुनियभर से लोग भारतीय सुरक्षा बालो की दरियादिली और कर्तव्य पालन की प्रशंशा करते हुए देखे जा सकते है।

मीडिया खबरों और वायरल सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) के रामबन जिले में भूस्खलन की वजह से जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (Jammu-Srinagar National Highway) पर एक महिला और तीन बच्चों सहित फंस गयी। उसके पास वंहा से बाहर निकलने का कोई विकल्प मौजूद नहीं था।

ठंड बढ़ रही थी, साथ ही भूख भी। परिवार के पास कोई ऐसा विकल्प मौजूद नहीं था, जिससे बह बाहर निकल किसी सुरक्षित स्थान पर पहुँच सके।

ऐसे में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान देवदूत बनकर पहुंचे। भीषण ठंड और 12 किमी तक वाहनों की कतार के बीच फंसे भूखे-प्यासे बच्चों के लिए सीआरपीएफ जवानों ने खाने का सामान और दूध पहुंचाया। खास बात यह कि मददगार बनकर पहुंचे सीआरपीएफ के इन जवानों को भीषण ठंड में पहाड़ी रास्ते पर 12 किमी पैदल चलना पड़ा।

CRPF जवानों ने भूखे बच्चों तक पहुंचाया खाना

मीडिया खबरों के अनुसार, रामबन के पास राष्ट्रीय राजमार्ग में पर भूस्खलन की वजह से आसिफा का परिवार जाम में फँस गया था। विषम परिस्थितियों में आसिफा ने शाम को 5:30 बजे केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की ‘मददगार’ हेल्पलाइन पर सम्पर्क साधा और बताया कि उनका परिवार जाम में फँसा हुआ है।

आसिफा ने फोन पर बताया कि उनके बच्चे भूखे हैं और उन्होंने सुबह से कुछ नहीं खाया है। इतना सुनते ही CRPF की 157वीं बटालियन तुरंत एक्शन में आ गई और दाल-चावल, दो-ढाई लीटर दूध, 6 लीटर गर्म पानी, फल और बिस्किट के पैकेट बाँधकर पैदल ही बर्फ़ीले रास्ते पर निकल पड़े। इस टीम में CRPF के जवान जमा देने वाली कड़ाके की ठंड में 12 किमी तक पैदल चले और आसिफा तक पहुँचे।

इस बाबत सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि बल के सहायता डेस्क ‘मददगार’ पर आसिफा नाम की महिला ने सहायता के लिए कॉल की थी। इसके बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (Central Reserve Police Force) ने तेजी से कार्रवाई की। यह महिला अपने तीन बच्चों और परिवार के दो अन्य सदस्यों के साथ श्रीनगर से जम्मू जा रही थीं, लेकिन भारी भूस्खलन के कारण डिगडोले में फंस गई।

12 किमी पैदल तय किया सफर

कमांडेंट ने बताया कि ट्रैफिक जाम इतना ज्यादा था कि परिवार तक किसी वाहन से पहुंचना बेहद मुश्किल था। ऐसे में सीआरपीएफ के यह जवान पैदल ही ठंड के बीच 12 किमी तक चलकर परिवार के पास पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस काम के लिए तुरंत 6 जवानों की टीम बनाई गई। 2 किमी पैदल चलने के बाद उन्हें मार्ग पर लंबा जाम दिखा, लेकिन, उस परिवार तक पहुँचने में कुल 12 किमी चलना पड़ा।

उन्होंने बताया कि महिला का फोन आया था इसलिए उन्हें और उनकी टीम को आसिफा के परिवार को खोजने में किसी तरह की कोई समस्या नहीं हुई। वहाँ जाकर उन्होंने देखा कि आसिफा के दो बच्चे हैं, जिनमें से एक की उम्र 3 साल और दूसरे की उम्र 4 साल थी और वो भूख से बेहाल थे। इस दौरान उन्होंने बच्चों और उनके परिवार से कहा:-

घबराने की जरूरत नहीं। खाना आ गया है। यह सुनकर उनके चेहरे पर चमक आ गई। बच्चों के होंठों पर मुस्कान आ गई। हमने उस परिवार से कहा कि हमारे साथ चलिए, लेकिन गाड़ी में बैठी दोनों महिलाओं ने पैदल चलने में असमर्थता जताई।

हमने कहा कि अगर जाम नहीं खुलता है तो हम आपको उठाकर ही अगले स्टेशन तक चलेंगे। लेकिन, वो लोग वहीं रुकना चाहते थे। वहां सैकड़ों गाड़ियां फंसी हुई थीं। इसलिए किसी तरह का कोई खतरा नहीं था। उन्हें सिर्फ खाना चाहिए था।

उनके खाना खाने तक हम रुके रहे। रात के 8 बज चुके थे। हमने उन्हें फोन नंबर दिए और कहा कि अगर और खाने की जरूरत पड़े तो बताइगा। उसके बाद हम 12 किमी पैदल चलकर रात 11 बजे वापस कैंप पहुंच गए। उस परिवार का कोई फोन नहीं आया तो हमने उन्हें फोन किया। उन्होंने कहा कि खाना बचा हुआ है। सुबह जब वे जम्मू पहुंच गए तो उन्होंने फोन करके शुक्रिया कहा।

‘मददगार’ हेल्पलाइन

बता दे, कश्मीर में टेलीफोन सेवा बंद होने पर ‘मददगार’ हेल्पलाइन ने हज़ारों लोगों की मदद की थी। इसने देश के अलग-अगल हिस्सों में रहने वाले लोग जो कि कश्मीर में परिजनों के साथ सम्पर्क नहीं कर पा रहे थे, उनके लिए भी इस हेल्पलाइन को शुरू किया गया था। लोग ‘14411’ नंबर और 9469793260 नंबर पर सम्पर्क कर कश्मीर में अपने परिजनों से सम्पर्क कर पा रहे थे। इस हेल्पलाइन से बाबा अमरनाथ की वार्षिक यात्रा में भी लोगों की मदद की थी।

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