भारतीय प्रोफेसर ने पेश की प्राकृति प्रेम की मिसाल, 25 देशों सहित दुनिया भर में छाया कारोबार, संभाल रहे हैं करोड़ों का व्यापार

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बेंगलुरू राज्य सरकार के आदेश के मुताबिक बीते 1 जनवरी 2019 से प्लास्टिक के उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। ऐसे में प्लास्टिक व्यापार के बड़े स्तर पर कारोबार बंद हो गया था, तो वहीं इस दौर में भारतीय प्रोफेसर साजी वर्गीज ने पर्यावरण के हित में अपनी एक नई इन्वेंशन कर ना सिर्फ बेंगलुरू के सबसे बड़े व्यापार नारियल बिक्री में मदद की, बल्कि साथ ही उन्होंने दुनिया भर में अपने इस काम के लिए सराहना भी बटौरी हैं।

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नारियल के पत्ते से तैयार किया स्ट्रॉ

यह बात सभी जानते हैं कि केरल, चेन्नई और भारत का सभी साउथ एरिया खास तौर पर नारियल के व्यापार के लिए जाना जाता है। ऐसे में नारियल पानी के लिए स्ट्रॉ होना बेहद जरूरी है, लेकिन राज्य सरकार के आदेश के बाद प्लास्टिक व्यापार पर लगे प्रतिबंध से इस व्यापार पर भी खासा असर पड़ा था। ऐसे में क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी के प्रोफ़ेसर ने नारियल के पत्तों से एक ऐसा प्रोडक्ट तैयार किया, जो न केवल पर्यावरण के हित में था बल्कि तटीय क्षेत्रों में भी ग्रामीण महिलाओं को इससे बड़े स्तर पर रोजगार मिला।

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जब रखी स्ट्रॉ व्यापार की नींव

प्रोफ़ेसर साजी वर्गीज की इन्वेंशन केरल के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई। इससे ना सिर्फ प्लास्टिक से निजात की समस्या का हल हुआ, बल्कि साथ ही बड़े स्तर पर लोगों को खासतौर पर महिलाओं को रोजगार भी मिला। वहीं इस मामले पर प्रोफ़ेसर वर्गीज का कहना है कि यह आईडिया उन्हीं तब आया था जब वह 2017 में अपने कॉलेज कैंपस में घूम रहे थे।

उन्होंने बताया कि कैंपस में घूमते समय उनकी नजर सूखे नारियल के पत्ते पर पड़ी, जो कि बिल्कुल स्ट्रॉ की तरह दिखाई दे रहा था। इस पर लंबे समय तक विचार कर उन्होंने साल 2018 में इसकी शुरुआत की और वर्गीज ने नारियल के पत्ते के इस आइडिया को सफलतापूर्वक विकसित किया।

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पूरी तरह से ऑर्गेनिक है स्ट्रॉ

प्रोफेसर वर्गीज ने बताया कि यह पाइप पूरी तरह से ऑर्गेनिक होता है और इसे फूड ग्लो से चिपका कर बनाया जाता है। इसे आगामी 12 महीने तक सही और सुरक्षित रखा जा सकता है। इतना ही नहीं यह नारियल के पत्ते से बना स्ट्रॉ करीबन 6 घंटे तक पानी में रह सकता है। इन 6 घंटों के दौरान यह बिल्कुल खराब नहीं होता है।

इस तरह की शुरूआत

इस दौरान प्रोफ़ेसर वर्गीज ने बताया की शुरुआती समय में हमें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ऐसे में हमने बुनियादी मशीनों का उपयोग कर पहले स्ट्रोक का उत्पादन शुरू किया। इसके बाद हमने मुदराई, तूतीकोरिन और कासरगोड जिले में तीन यूनिट स्थापित की और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देकर स्ट्रॉ बनाने का काम शुरू किया।

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आज 25 देशों में होता है इसका व्यापार

प्रोफ़ेसर वर्गीज ने अपने इस ब्रांड का नाम SunBird रखा। इसकी क्वालिटी और जरूरत के चलते यह जल्द ही लोगों के बीच मशहूर हो गया। इतना नहीं इतना ही नहीं एक साल में यह ब्रांड विदेशों तक पहुंच गया और तेजी से इसके लिए आर्डर आने लगे। अब तक यह ब्रांड अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ सहित 25 देशों में अपनी पहचान खड़ी कर चुका है।

बता दे नारियल के पत्तों से बने इस इस स्ट्रॉ की कीमत 5 है। वही प्रोफेसर वर्गीज ने इसका पेटेंट भी हासिल कर लिया है अब यह बड़े तौर पर विदेशों में उत्पादन किया जाता सकता है।

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