IT की नौकरी छोड़ शुरू किया महाराष्ट्रियन खाने का काम, मेहनत के दम पर खड़े किए 14 रेस्टोरेंट

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इंजीनियरिंग की पढ़ाई सभी जानते हैं कि काफी मुश्किल होती है। पहले एंट्रेंस फिर लंबी और कठिन पढ़ाई…इसके बाद कॉलेज का कॉपटिशन भरा दौर…इन सब से गुजर कर एक अच्छी नौकरी नसीब होती है।

ऐसे में उस नौकरी को छोड़ना यह कोई आसान बात नहीं होती, लेकिन महाराष्ट्र की जयंती काठले ने ये कठिन फैसला किया और आज उनका यह फैसला उनकी बड़ी कामयाबी की वजह बना। आइये जानते है जयंती जी का इंजीनियरिंग से लेकर महाराषट्रियन खाने तक का सफर कैसा है।

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विदेश दौरे पर मिस किया देसी खाना

जयंती काठले के जीवन की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने कठोर मेहनत और परिश्रम से अमेरिका में इंजीनियरिंग की जॉब हासिल की थी। जयंती इंफोसिस कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर और बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर काम करती थी। एक समय की बात है कि जयंती विदेश दौरे पर थी। इस दौरान सभी जगह घूमते हुए सिर्फ एक चीज को ही मिस किया और वह था उनका खाना यानी महाराष्ट्र खाना।

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जब पति की चिट्ठी ने किया भावूक

इसके बाद जयंती की शादी हो गई। उनके पति पेरिस में नौकरी करते थे। वह वहीं से अक्सर अपनी पत्नी को चिट्ठी लिखते थे। एक बार उन्होंने चिट्ठी लिखी और जयंती को बताया कि वहां उन्हें इंडियन खाना ढूंढने में काफी परेशानी होती है। वह वेजिटेरियन है और उन्हें उनकी पसंद का खाना वहां कहीं नहीं मिलता। उन्होंने जिस वक्त वह चिट्ठी लिखी वह उस वक्त भी भूखे थे। उन्होंने इस बात का जिक्र अपनी चिट्ठी में किया था।

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जयंती बताती हैं कि उनकी उस चिट्ठी पर आंसू की कुछ बूंदे भी गिरी हुई थी। इस चिट्ठी ने उन्हें भावूक कर दिया। ये पहली बार था, जब उनके मन में रेसटोरेंट खोलने का ख्याल आया था।

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जब कर लिया इरादा पक्का

इसके बाद भी एक और ऐसा ही वाक्या हुआ जब जयंती अपने पति के साथ ऑस्ट्रेलिया जा रहे थे। इस दौरान भी उनके पति को कुछ वेजिटेरियन खाने को नहीं मिला और वह भूखे रह गए। इस वाक्य के बाद जयंती ने अपना इरादा पक्का कर लिया कि वह वेजिटेरियन खाने से जुड़ा काम शुरू करेंगी।

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छोड़ दी Infosys की नौकरी

इसके बाद ऑस्ट्रेलिया में 2 साल की नौकरी करने के बाद जयंती ने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। नौकरी छोड़ने के बाद जयंती में पूर्णब्रह्मा की स्थापना की। यह एक ऐसा रेस्टोरेंट है जिसमें आप महाराष्ट्र के हर खाने का स्वाद चख सकते हैं। पूर्णब्रह्मा पूरी तरह वेजिटेरियन व्यंजनों को परोसा है। इसमें श्रीखंड से लेकर पूरनपोली तक हर तरह के पारंपरिक महाराष्ट्रीयन खाने को परोसा जाता है।

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मोदक से की शुरूआत

जयंती ने अपने पूर्णब्रह्मा के कारोबार की शुरुआत गणपति बप्पा के व्यंजन मोदक से की। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु में अपना पहला पूर्णब्रह्मा नाम का रेस्टोरेंट खोला। शुरुआत में काफी आर्थिक परेशानियां आई और इसके बाद उन्होंने लगातार पूर्णब्रह्मा की तीन ब्रांच खोली। आज उनके मुंबई, पुणे, अमरावती से लेकर ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन तक कई रेस्टोरेंट है।

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बकौल जयंती इनकी खास बात यह है कि यहां पर सभी को समान वेतन दिया जाता है। इसके अलावा इस रेस्टोरेंट का एक खास रूल भी है, जिसके मुताबिक पूरा खाना खत्म करने वाले कस्टमर को 5% का डिस्काउंट दिया जाता है, जबकि खाना छोड़ने वाले कस्टमर को 2 परसेंट अधिक पर करना पड़ता है। ऐसे में लोग डिस्काउंट का फायदा लेने के लिए खाना वेस्ट नहीं करते है।

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