इस दशहरा सिद्ध कर लें रामचरितमानस की ये चौपाईयां, जरूर पूरी होगी सभी मनोकामनाएं

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siddh kar le raamayan kee ye chaupaiyaan

जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जहां पर हमारे लिए यह तय करना मुश्किल होता है कि क्या करें क्या नहीं। संकट के समय में जब कोई रास्ता नहीं दिखता है तो अंत में हम कठिन परिस्थितियों से बहार निकलने के लिए परमपिता परमेश्वर को याद करते हैं। आज हम आपको संकटो से बहार निकलने ले तमाम उपाय बताएंगे। प्रभु श्रीराम (Lord Rama) से जुड़ी तमाम चौपाईयां न सिर्फ तमाम दु:खों और कष्ट से उबारने का काम करती हैं बल्कि सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। विजयदशमी के पावन पर्व पर रामचरितमानस की तमाम चौपाईयों में से किसी एक को मंत्र मानकर श्रद्धापूर्वक जपने से प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है।

हिंदू धर्म में रामचरितमानस का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। रामचरित मानस एक पवित्र ग्रंथ के साथ-साथ मानव जीवन के लिये भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। कई बार हमारे जीवन में कई ऐसी घटनाएं होती हैं जिनके कारण हम बहुत कमजोर पड़ जाते हैं और उसका सामना करने में हम कुछ सोच नहीं पाते। ऐसे में कभी कभी हमारे धर्म ग्रंथ हमारी मदद कर सकते हैं। जी हां, रमाचरित मानस में चौपाईयों की मदद से हम अपने जीवन की कठिनाईयों से आसानी से निकल सकते हैं। विजयदशमी के पावन पर्व पर रामचरितमानस की चौपाईयों में से किसी एक को मंत्र मानकर श्रद्धापूर्वक जपने से जरूर ही इच्छा पूरी होती है। आइये जानते है थोड़ा विस्तार से।

ऐसे करें चौपाईयों को सिद्ध

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श्रीरामचरित मानस के दोहे-चौपाईयों को सिद्ध करने के लिए विजयादशमी के दिन स्नान—ध्यान करने के पश्चात् अष्टांग हवन के द्वारा सिद्ध करना चाहिये। इसके पश्चात् जिस कार्य के लिये मानस का दिव्य मन्त्र आप सिद्ध कर रहें हों, उसके लिए नित्य एक माला जप अवश्य करें।

श्रीरामचरितमानस के सिद्ध मंत्र

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मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये-
भव भेषज रघुनाथ जसु,सुनहि जे नर अरू नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहि त्रिसिरारि।।

संतान प्राप्ति के लिये-
प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान।।

परीक्षा में सफलता पाने के लिये-
जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥

विवाह में आ रही समस्या के लिए-
तब जन पाई बसिष्ठ आयसु ब्याह। साज सँवारि कै।।
मांडवी, श्रुतकी, रति, उर्मिला कुँअरि लई हंकारि कै।।

संपत्ति की प्राप्ति के लिए
जे सकाम नर सुनहि जे गावहि। सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।

हर प्रकार के संकट दूर करने के लिए
दीनदयाल बिरिदु सम्भारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।

मुकदमा जीतने के लिए
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।

यात्रा की सफलता के लिए
प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदय राखि कोसलपुर राजा।।

किसी भी संकट को दूर करने के लिए
दीनदयाल बिरिदु सम्भारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।

परस्पर प्रेम बढ़ाने के लिए
सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥

रोजगार पाने के लिए
विस्व भरण पोषण कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।

विद्या प्राप्ति के लिए
गुरु गृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥

आलस्य से मुक्ति पाने के लिए
हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रणाम।
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम।।

प्रभु श्रीराम से जुड़ी तमाम चौपाईयां न सिर्फ तमाम दु:खों और कष्ट से उबारने का काम करती हैं बल्कि सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। विजयदशमी के पावन पर्व पर रामचरितमानस की तमाम चौपाईयों में से किसी एक को मंत्र मानकर श्रद्धापूर्वक जपने से प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है।

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