जब एक किन्नर को जनता ने बना दिया था ‘गोरखपुर मेयर’, दिग्गज नेताओं की भी जब्त हो गई थी जमानत

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किन्नर आशा देवी

राजनीति की दुनिया भी बड़ी अजीब होती है कभी-कभी दिग्गज से दिग्गज नेता भी एक मामूली इंसान से परास्त हो जाया करते हैं। कुछ ऐसा ही वर्ष 2001 के गोरखपुर महानगर चुनाव में हुआ था जब आशा देवी महापौर चुनी गई थी। वह गोरखपुर की तीसरे महापौर थी और उस वक्त प्रदेश में भाजपा की सरकार चल रही थी। बता दें कि जब आशा देवी मैदान में उतनी तो यहां के चुनाव का राष्ट्रीय फलक पर आ गया था। सभी की निगाहें बस एक ही चीज का इंतजार कर रहीं थी और वो था चुनाव के परिणाम।

मैदान में भाजपा समेत कांग्रेस, बसपा और सपा के प्रत्याशी भी मौजूद थे और सबसे हैरान कर देने वाली बात तो यह थी कि जब चुनाव परिणाम आया तो तमाम दिग्गज नेताओं की जमानत जब्त हो गयी थी। जी हां, सपा पार्टी से उस वक्त की प्रत्याशी पूर्व मेयर अंजू चौधरी को 60,000 से भी अधिक वोटों से मात मिली थी। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये आशा देवी कौन है। तो बता दे आशा देवी एक किन्नर थीं जिन्होंने पहली बार मैदान में ना सिर्फ उतरा बल्कि मैदान मार भी लिया था। उस दौरान किन्नर नारा लगा रहे थे कि नेताओं ने भाई भतीजावाद के सिवा और कुछ नहीं दिया जबकि उनका समाज दूसरों के लिए हमेशा दुआएं मांगता है।

किन्नर आशा देवी का चुनाव चिन्ह ‘चूड़ी’ था और चुनाव के दौरान एक ऐसी घटना हुई थी जब एक पत्रकार साथी ने बताया कि मतदान केंद्र पर बुर्का पहने कुछ महिलाएं मतदान करने जा रहे थे और उसी दौरान किसी ने उनसे पूछा यह वोट सपा के पक्ष में जाएगा। ऐसा सुनकर वोट देने जा रही महिलाओं ने हाथ उठाकर चूड़ियां खनकाते हुए आगे बढ़ गई, इशारा बिना बोले दे दिया गया था। बताते चलें कि नतीजा भी कुछ ऐसा ही आया और आशा देवी 60% अधिक वोट पाकर गोरखपुर की पहली किन्नर मेयर बनी थी। उस दौरान सभी प्रत्याशियों की जमानत जप्त हो गई थी।

हैरानी की बात तो यह थी कि आशा देवी ने चुनाव जीतने के बाद जब पहली बार नगर निगम आए तो सभी को हैरान कर दिया क्योंकि उन्होंने पहले भी वादा किया था वह हमेशा गरीब और समाज के उपेक्षित वर्गों के साथ रहेंगी। अपने वादे के अनुसार जब वो अपने खास रिक्शे से चुनाव जीतने के बाद नगर निगम पहुंचे तो हर किसी की निगाहें एकटक उनपर ही टिक गयीं थी। महापौर बनने के बाद हर कोई सोचता है कि वह लाल बत्ती वाली गाड़ी में आएगा मगर सड़कों पर किन्नर आशा देवी का रिक्शा आकर्षण का केंद्र बन चुका था।

आपको यह भी बता दें कि आशा देवी जब चुनाव के मैदान में उतरी थी तो उस दौरान उनके प्रचार की कमान मध्य प्रदेश की विधायक किन्नर शबनम मौसी ने संभाली थी। चुनाव प्रचार में कई दिनों तक शबनम मौसी ने गोरखपुर शहर में अपना डेरा डालकर कई सभाओं को संबोधित कर जनता को आशा देवी के पक्ष में करने का काम भी बहुत ही बेहतर तरीके से किया था। हालांकि स्थानीय किन्नरों का समर्थन भी आशा देवी के काफी काम आया था।

उस दौरान हर वक्त बस एक ही नारा लगा रहता था ‘नेताओं ने क्या दिया भाई भतीजावाद दिया’ और यह नारा उन दिनों काफी चर्चित भी था। लोगों में नेताओं के प्रति काफी गुस्सा था जिसका परिणाम आशा देवी को महापौर का पद मिलना हुआ। मगर दुर्भाग्य की बात है कि साल 2013 में किन्नर आशा देवी का आकस्मिक निधन हो गया था।

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