आज विनायकी चतुर्थी के साथ शनि का अद्भुत संयोग, इस तरह करे अभिनन्दन, मिलेगा मनोवांछित फल

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Vinayaki Chaturthi 2019

हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर मास में दो चतुर्थी आती हैं। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। शनिवार, 30 नवंबर को अगहन यानी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है। इसे विनायकी चतुर्थी कहते हैं। इस दिन​ भगवान श्री गणेश की ​विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे प्रसन्न होकर विघ्नहर्ता गणेश जी भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार शनिवार को शनि के लिए विशेष पूजा-पाठ की जाती है। इस बार शनिवार को चतुर्थी व्रत होने से इस दिन शनि के साथ ही गणेशजी की भी पूजा खासतौर पर करनी चाहिए। उनके आशीर्वाद से सभी बिगड़े का बन जाते हैं और उसमें सफलता प्राप्त होती है।

विनायक चतुर्थी पर ऐसे करें गणेशजी की पूजा

इस दिन श्री गणेश की पूजा करने और व्रत रखने से परिवार में सुख-समृद्धि, आर्थिक संपन्नता, ज्ञान एवं बुद्धि का अशीर्वाद प्राप्त प्राप्त होता है। चतुर्थी तिथि पर सुबह जल्दी उठें, स्नान के बाद सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को जनेऊ पहनाएं। अबीर, गुलाल, चंदन, सिंदूर, इत्र आदि चढ़ाएं। पूजा का धागा, वस्त्र अर्पित करें। चावल चढ़ाएं। गणेशजी के मंत्र बोलते हुए दूर्वा चढ़ाएं। लड्डुओं का भोग लगाएं। कर्पूर से भगवान श्रीगणेश की आरती करें।

पूजा के बाद प्रसाद अन्य भक्तों को बांटें। अगर संभव हो सके तो घर में ब्राह्मणों को भोजन कराएं। दक्षिणा दें। पूजा के दौरान कपूर या घी का दीपक जलाकर गणेश जी की आरती अवश्य करें। विनायक चतुर्थी के दिन श्री गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक गणेश स्त्रोत का भी पाठ कर सकते हैं, यह आपके लिए फलदायी होगा। दिनभर फलाहार करते हुए शाम को भोजन करें। शाम के समय पारण से पूर्व भी आप गणेश जी की आराधना करें।

विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त

  • दिन: शनिवार, मार्गशीर्ष मास, शुक्ल पक्ष, चतुर्थी तिथि।
  • चतुर्थी तिथि: 30 नवंबर को शाम 06:05 बजे तक।
  • आज का दिशाशूल: पूर्व।
  • आज का राहुकाल: प्रात: 09:00 बजे से पूर्वाह्न 10:30 बजे तक।
  • आज की भद्रा: प्रात: 05:53 बजे से सायं 06:05 बजे तक।
  • सूर्योदय: प्रात: 06:55 बजे।
  • सूर्यास्त: सायं 05:24 बजे।

गणेशजी के इन 12 नाम मंत्रों का करें जाप

भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं और मंत्रों का जाप करें। मंत्र- ऊँ गणाधिपतयै नम:, ऊँ उमापुत्राय नम:, ऊँ विघ्ननाशनाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ ईशपुत्राय नम:, ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:, ऊँ एकदन्ताय नम:, ऊँ इभवक्त्राय नम:, ऊँ मूषकवाहनाय नम:, ऊँ कुमारगुरवे नम:।

शनि को चढ़ाएं नीले फूल

Lord Shani Dev

शास्त्रों के अनुसार, शनिदेव का स्वरूप नीला बताया गया है। इसीलिए शनि को नीले वस्त्र और नीले चढ़ाए जाते हैं। शनि के लिए तेल का दान कर सकते हैं। इस संबंध में मान्यता है कि पुराने समय में शनि और हनुमानजी के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में शनि की पराजय हुई थी। हनुमानजी के प्रहारों से शनि को पीड़ा हो रही थी। इस पीड़ा से मुक्ति के लिए हनुमानजी ने शनि को शरीर पर लगाने के लिए तेल दिया था। तेल लगाते ही शनि की पीड़ा दूर हो गई। तभी से शनि को तेल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

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