अजय देवगन को इंडस्ट्री का स्टार बनाने के लिए उनके पिता को करना पड़ा था ये सब

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अजय देवगन

फिल्म स्टार बनना इतना आसान नहीं होता है, बहुत स्ट्रगल करना पड़ता है बहुत मेहनत करनी पड़ती है। सालों का इंतजार, तमाम जगहों से धक्के खाने पड़ते हैं तब जाकर शायद आपकी किस्मत चमकती है और आप को एक चांस मिलता है। अगर आपने उस चांस को कैश करा लिया तो फिर आप फिल्म जगत में अपनी पहचान बना पाते हैं। आमतौर पर हर किसी के लिए स्टार बन पाना आसान नहीं होता मगर किसी की किस्मत और किसी की मेहनत मिलकर कभी उसे स्टार बना ही देती है।

कुछ ऐसा ही सोचकर वीरू देवगन ने मात्र 14 वर्ष की उम्र में बॉलीवुड में आने के लिए हसरत लिए अमृतसर से अपना घर छोड़कर भागे थे। मुंबई जाने के लिए उन्होंने फ्रंटियर मेल पकड़ ली और मुंबई पहुंचते ही उनका स्वागत ‘एक सप्ताह की जेल यात्रा’ के साथ हुआ क्योंकि उन्होंने ट्रेन की टिकट नहीं ली थी। जब जेल से बाहर आए तो मायानगरी में भूख ने उन्हें तोड़ दिया। उनके साथ कुछ दोस्तों निराश होकर तुरंत ही वापस लौट गए मगर वीरू नहीं। उन्होंने कम ढूंढा, टैक्सी साफ करने लगे, कारपेंटर का काम किया, थोड़ा हौसला जुठा तो फिल्म स्टूडियो के चक्कर भी लगाएं।

उन्हें बनना था एक्टर मगर जल्दी ही वो समझ गए कि फिल्मों में अभिनेता बनने के लिए एक चॉकलेटी चेहरा चाहिए और उनके सामने ऐसा कोई चांस नहीं था। वीरू खुद बताते हैं, “जब मैंने आईने में अपना चेहरा देखा तो दूसरे स्ट्रगलर्स के मुकाबले खुद को काफी पीछे महसूस किया। इसलिए मैंने वही पर हार मान ली, लेकिन उसी क्षण उन्होंने यह भी ठान लिया कि मेरा बेटा एक हीरो बनेगा।”

उन्होंने अपने बेटे अजय देवगन को कम उम्र से फिल्मेकिंग, एक्शन वगैरह से जोड़ना शुरु किया और उन्हें हीरो बनाने के लिए काफी मेहनत करी। अजय जब कॉलेज जाने लगे तो उनके लिए डांस क्लासेस शुरू कराई, घर में ही जिम बना दिया, उर्दू की भी शिक्षा दी। हॉर्स राइडिंग, एक्शन से जुड़े हर एक चीज की सुविधा उन्हें मुहैया कराई। थोड़ा आगे चलकर उन्हें अपनी फिल्मों के एक्शन टीम का हिस्सा भी बनाने लगे। अजय को हर एक पल, हर एक माहौल से वाकिफ कराना चाहते थे। खैर पिता की मेहनत भी जल्दी ही रंग लाई और अजय फिल्म मेकिंग को लेकर बहुत कम समय में ही काफी सक्षम हो गए थे।

कॉलेज में पढ़ाई के वक़्त जब अजय ने अभी फिल्मों में आने का कोई निर्णय नहीं लिया था उसी दौरान एक शाम से वह घर लौटे तो डायरेक्टर संदेश/कुकू कोहली उनके पिता वीरू देवगन के साथ बैठे थे। वीरू ने कहा कि संदेश ‘फूल और कांटे’ नाम की फिल्म बना रहे और तुम्हें इसमें लेना चाहते हैं। आपको यकीन नहीं होगा उसमें अजय की प्रक्रिया कैसी थी, अजय ने कहा “आप पागल हो क्या, अभी मैं सिर्फ 18 साल का हूं और अपनी लाइफ इंजॉय कर रहा हूं”। अजय ने फिल्म करने से साफ इंकार कर दिया और वहां से चले गए।

यह बात साल 1990 की है और उसके अगले ही महीने नवंबर में इस फिल्म की शूटिंग में अजय देवगन मौजूद थे। उन्हें इस फिल्म में मौका मिला इसके पीछे भी उनके पिता वीरू देवगन ने ही तैयारी कराई। उस फिल्म में अजय ने जबरदस्त एक्शन सीन के साथ अपनी डेब्यू फिल्म कोई सुपरहिट बनाया था।

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