अगर राम की मूर्ति बन सकती है तो उनकी मूर्ति क्यों नहीं बन सकती- मायावती

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Mayawati Murti Nirman

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सुप्रीम कोर्ट में एक अजीबोगरीब हलफनामा दिया है। अपने एफिडेविट में मायावती ने कहा है कि जब भगवान राम की मूर्ति बन सकती है तो उनकी मूर्ति क्यों नहीं लग सकती। बता दें कि लखनऊ के अंबेडकर पार्क में मायावती की मूर्तियां लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया था और उनसे जवाब मांगा था।

इस पर सुप्रीम कोर्ट में मायावती की तरफ से जो हलफनामा दायर किया गया है उसमें काफी चौंकाने वाली बातें हैं। मायावती ने लखनऊ और नोएडा में स्मारकों में लगी अपनी मूर्तियों को सही ठहराते हुए कहा है कि ये जनभावना का प्रतीक हैं।

उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में वंचित और दलित समुदाय के लिए किए गए उनके काम और त्याग को देखते हुए और दलित महिला नेता होने के नाते उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुए जनभावना के प्रतीक के तौर पर उनकी मूर्तियां लगाई गई हैं।

मायावती ने कहा कि जनभावनाओं को देखते हुए उनकी मूर्तियां अंबेडकर और कांशीराम के साथ लगाई गईं और ये कैबिनेट के फैसले के बाद हुआ था। मायावती ने दलील दी है कि अपने समाज के लिए उन्होंने शादी नहीं की और पूरी जिंदगी बहुजन मिशन के साथ जुड़ने का फैसला किया। इसी त्याग की वजह से उनकी मूर्तियां लगाना सही है।

इसी के साथ बीएसपी सुप्रीमो ने अयोध्या में लगने वाली भगवान राम की मूर्ति से अपनी तुलना की। मायावती ने पूछा है कि सरकारी पैसे से 221 मीटर की भगवान राम की मूर्ति बन सकती है तो उनकी क्यों नहीं। मायावती ने इसी क्रम में गुजरात सरकार द्वारा 3,000 करोड़ रुपये की लागत से सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची मूर्ति और मुंबई में शिवाजी महाराज की मूर्तियों का भी जिक्र किया।

मायावती ने कहा है कि कांशीराम की मूर्तियों के साथ उनकी मूर्तियां लगाने की विधानसभा की इच्छा के खिलाफ वह नहीं जा सकती थी। उनकी मूर्तियां लगाया जाना विधानसभा की जनभावनाओं को प्रदर्शित करने की इच्छा का नतीजा हैं।

इसके साथ ही मायावती ने सिर्फ उनकी मूर्तियों को निशाना बनाए जाने को राजनीति से प्रेरित बताते हुए देश के अन्य हिस्सों में सरकारी खर्च से बनी मूर्तियों का उदाहरण दिया है जिनके बारे में सवाल नहीं उठाए गए।

इनमें बसपा प्रमुख ने गुजरात में सरदार पटेल की स्टैचू ऑफ यूनिटी और अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भगवान राम की सबसे बड़ी मूर्ति बनाए जाने की घोषणा का उदाहरण दिया है। साथ ही देश के अन्य हिस्सों में लगी मूर्तियों का हवाला दिया है।

आपको बता दे, मायावती ने यूपी की मुख्यमंत्री रहते हुए अपनी और अन्य दलित नेताओं की मूर्तियां बनवाई थीं। इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

मायावती की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शपथपत्र में पूछा गया है कि जब अयोध्या में राम की 221 मीटर ऊंची मूर्ति बनाने का प्रस्ताव दिया गया तो कोई आपत्ति क्यों नहीं की गई।

मालूम हो कि मायावती जब उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं तब उन्होंने लखनऊ और नोएडा में दलित स्मारकों का निर्माण कराया था। वहां दलित नेताओं और संतों की मूर्ति के साथ अपनी मूर्तियां और हाथियों की मूर्तियां भी लगी हैं। रविकांत ने याचिका में इन मूर्तियों के निर्माण हुए सरकारी खर्च को मायावती और बसपा पार्टी से वसूले जाने की मांग की है।

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