आजम खान के बेटे का निर्वाचन रद्द, हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला, यानि अब अब्दुल्ला विधायक नहीं रहेंगे

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uttar pradesh allahabad high court cancelled the election of abdullah azam found guilty of using fake birth certificates and documents

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सपा नेता आज़म (Azam Khan) व उनके परिवार को लगा बड़ा झटका लगा है। आजम खान (Azam Khan) के बेटे और रामपुर की स्वार सीट से विधायक अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam) की विधानसभा की सदस्यता रद्द कर दी है। यानि कि अब अब्दुल्ला विधायक नहीं रहेंगे। 2017 के चुनाव में अब्दुल्ला रामपुर की स्वार सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। उनका यह पहला चुनाव था।

सांसद आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ा झटका लगा है। गलत उम्र बताने के आरोप में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अब्दुल्ला का निर्वाचन रद्द कर दिया है।
2017 के चुनाव में अब्दुल्ला रामपुर की स्वार सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। बसपा नेता नवाब काजिम अली ने अब्दुल्ला की उम्र को आधार बनाकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

दलील दी थी कि, चुनाव के वक्त अब्दुल्ला 25 साल के नहीं थे, बल्कि उस वक्त उनकी उम्र करीब 11 महीने कम थी। अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में अपनी उम्र 26 साल बताई थी। आपको बता दे, आजम खान और तंजीन फातिमा के दो बेटे अदीब आजम और अब्दुल्ला आजम हैं। अब्दुल्ला आजम छोटे बेटे हैं, जिन्होंने बीटेक के बाद नोएडा की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी से 2015 में एम. टेक की पढ़ाई पूरी की।

इसके बाद 2017 में अब्दुल्ला ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर स्वार सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ा। बीजेपी की लहर में जहां समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन परास्त हो गया, वहीं बहुजन समाज पार्टी भी बुरी तरह हार गई। इस सबके बावजूद आजम खान अपनी सीट रामपुर और बेटे अब्दुल्ला की स्वार सीट बचाने में कामयाब रहे और दोनों ही सीटों पर सपा की जीत हुई। 26 साल की उम्र में चुनाव जीतकर वो यूपी विधानसभा में सबसे कम उम्र के विधायक भी बन गए।

क्या है पूरा मामला?

2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा नेता नवाब काजिम अली 20.5% वोट पाकर तीसरे नंबर पर थे। उसके बाद काजिम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि अब्दुल्ला की जन्मतिथि एक जनवरी 1993 है। काजिम का कहना था कि अब्दुल्ला ने चुनाव लड़ने के लिए जाली दस्तावेज दाखिल किए और झूठा शपथपत्र लगाया था।

काजिम ने दावे के तौर पर कई दस्तावेज भी कोर्ट को दिए। काजिम ने अब्दुल्ला आजम के हाईस्कूल की मार्कशीट, पासपोर्ट समेत कई दूसरे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि को आधार बनाया। उन्होंने निर्वाचन रद्द किए जाने की मांग करते हुए नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की थी।

बता दे, अब्दुल्ला आजम ने बीजेपी उम्मीदवार लक्ष्मी सैनी को 50 हजार से ज्यादा मतों से हराया था, जबकि बीएसपी के नवाब काजिम अली तीसरे नंबर रहे थे। बता दें कि नवाब काजिम अली इस सीट से लगातार तीन बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने हैं। उन्होंने 2002, 2007 और 2012 में कांग्रेस के टिकट पर स्वार से चुनाव जीता था, लेकिन 2017 में जब वो बसपा के टिकट पर लड़े तो अब्दुल्ला आजम ने उन्हें रिकॉर्डतोड़ मतों से मात दी।

अब्दुल्ला आजम ने जीत तो दर्ज कर ली, लेकिन नवाब काजिम अली ने उनके खिलाफ शिकायत कर दी। काजिम अली ने आरोप लगाया कि उम्र ज्यादा बताने के लिए फर्जी दस्तावेज दिए गए, जिनके आधार पर चुनाव लड़ा गया। बता दें कि चुनाव लड़ने के लिए 25 साल उम्र की सीमा है और आरोप है कि चुनाव लड़ने के वक्त अब्दुल्ला की उम्र थी, लेकिन उन्होंने फर्जी दस्तावेज के आधार पर चुनाव लड़ा।

अब्दुल्ला की तरफ से ये दी गई थी दलील

बता दें कि यूपी विधानसभा के वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, अब्दुल्ला आजम की जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 बताई गई है। अब्दुल्ला आजम की तरफ से कोर्ट में दलील दी गई थी कि प्राइमरी में दाखिले के समय शिक्षक ने गलत जन्मतिथि अंकित कर दी थी। अब्दुल्ला ने कोर्ट को बताया था कि, जब वह एम. टेक कर रहे थे, तब हाईस्कूल सहित अन्य प्रमाण पत्रों में दर्ज जन्मतिथि बदलवाने की प्रक्रिया शुरू की थी।

पासपोर्ट पर जन्मतिथि संशोधित हो चुकी है। अब्दुल्ला ने बताया कि, उनका जन्म 30 सितंबर 1990 को राजधानी लखनऊ के क्वींस मेरी अस्पताल में हुआ था। इस मामले में कोर्ट में अब्दुल्ला की मां ताजीन फातिमा, डॉक्टर उमा, विद्यालय के प्रधानाचार्य सहित कुल 9 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

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