ऐसे तय होती है IAS और IPS की रैंक, पढ़िए क्या है UPSC का पूरा फॉर्मूला

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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सबसे रेपूटिड नौकरी का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म। UPSC की परीक्षा साल में एक बार होती है जिसे हमतुम सिविल सर्विस एग्जाम के नाम से जानते हैं। हाल ही में साल 2019 का यूपीएससी रिजल्ट घोषित किया गया है। हर बार की तरह इस साल भी टॉप प्रतियोगी खबरों में बने हुए हैं। यहां बात करेंगे कि यूपीएससी में रैंक कैसे बनती है, कैसे IAS, IPS और IFS के पद वितरित किए जाते हैं।

रैंकिंग समझने से पहले जरूरी है कि यूपीएससी परीक्षा क्या है और परीक्षा में क्या-क्या पूछा जाता है। तो आपको बता दें कि दो सेक्शन में बंटी इस सर्विस में 24 सर्विसेज होती हैं। पहली है केंद्रीय सेवाएं (Central Services) जिसमें ऑल इंडिया सर्विसेज हैं वो IAS (इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज) और IPS (इंडियन पुलिस सर्विसेज) हैं. इनमें जो लोग चुने जाते हैं, उनको राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का कैडर दिया जाता है.

केंद्रीय सेवाओं में ग्रुप ए और ग्रुप बी सेवाएं होती हैं। ग्रुप ए की सेवाओं में इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS), इंडियन सिविल एकाउंट्स सर्विस (ICAC), इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) (इनकम टैक्स पोस्ट्स), इंडियन रेलवे सर्विस (IRTS और IRPS) और इंडियन इनफार्मेशन सर्विस (IIS) जैसी सेवाएं आती हैं। वहीं, UPSC में ग्रुप बी में आर्म्ड फोर्सेज हेडक्वार्टर्स सिविल सर्विस, पांडिचेरी सिविल सर्विस, दिल्ली एंड अंडमान निकोबार आइलैंड सिविल और पुलिस सर्विस जैसी सेवाएं होती हैं।

ये परीक्षा का पेटर्न
यूपीएससी में दो एग्जाम देने होते हैं, जिसे प्रीलिमिनरी और मेन्स के नाम से जाना जाता है। प्रीलिमिनरी की बात करें तो इसमें दो-दो घंटे की दो परीक्षा होती हैं। पहली परीक्षा के आधार पर कट ऑफ तैयार होती है। दूसरा पेपर यानी CSAT क्वालिफाइंग पेपर होता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होते हैं। इधर एक बात ध्यान देने वाली यह है कि ये दोनों परीक्षा एक दिन में अलग-अलग शिफ्ट में होती हैं। अगर आपने पहली परीक्षा पास कर ली है और दूसरी परीक्षा क्वालीफाई नहीं कर पाते हैं तो आपकी प्रीलिमिनरी परीक्षा पास नहीं मानी जाएगी।

UPSC की मेन परीक्षा
प्रीलिमिनरी एग्जाम करने के बाद आपको मेन परीक्षा में बैठने का सौभाग्य प्राप्त होगा। मेन की परीक्षा देना भी परीक्षार्थियों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। चलिए जानते हैं मेन परीक्षा में कितने और कौन-कौन से एग्जाम होते हैं।

  1. सबसे पहले दो क्वालिफाइंग लैंग्वेज पेपर होते हैं। दोनों में अलग-अलग 33 प्रतिशत अंक लाना जरुरी है। हालांकि इनके नंबर मेरिट लिस्ट बनाने में काउंट नहीं होते हैं। ये तीन-तीन घंटे के पेपर्स होते हैं. एक इंडियन/रीजनल लैंग्वेज और दूसरा अंग्रेजी। 2. इसके बाद एक निबंध का पेपर होता है। इसमें परीक्षार्थी को तीन घंटे में दो निबंध लिखने होते हैं। दोनों निबंधों को लिखने के लिए अलग-अलग टॉपिक मिलते हैं जिनमें से आप अपनी पसंद का विषय चुनने के योग्य होते हैं।
  2. इसके बाद तीन-तीन घंटे के चार पेपर जनरल स्टडीज के होते हैं। एक दिन में दो से ज्यादा पेपर हो नहीं सकते. तो इनकी उसी हिसाब से टाइमटेबल बनाई जाती है। 4. इन सबके बाद आखिर में ऑप्शनल पेपर होता है. जिसमें दो एग्जाम होते हैं- पेपर 1 और पेपर 2. ये वो सब्जेक्ट होता है जो आप अपने लिए चुनते हैं. हिंदी में इनको वैकल्पिक विषय कहा जाता है. लैंग्वेज पेपर्स को छोड़कर बाकी सभी पेपर्स के नंबर जोड़े जाते हैं और मेरिट लिस्ट तैयार होती है।

कुल मिलाकर पांच से सात दिनों में 27 घंटों में ये एग्जाम पूरा होता है। इन दिनों के बीच अगर कोई इतवार या नेशनल छुट्टी आ गई तो उसकी छुट्टी मिलती है। इसके बाद मेंस का रिजल्ट आता है और पर्सनैलिटी टेस्ट होता है., जिसे पर्सनल इंटरव्यू भी कहते है उसके नंबर जोड़कर रिजल्ट तैयार होता, फिर रैंकिंग आती है।

ऐसे तय होती है UPSC में रैंकिंग
यूपीएससी में हर साल अलग-अलग विभाग, पोस्ट और अलग-अलग शहरों के लिए वैकेंसी जारी की जाती है। फिर परीक्षार्थी अपने अनुसार पोस्ट, शहर और विभाग का चुनाव करते हैं। जनरल, SC,ST,OBC, EWS (इकॉनोमिकली वीकर सेक्शंस यानी जो आर्थिक रूप से कमज़ोर कैटेगरी में आते हैं). जो भी व्यक्ति एग्जाम देता है, वो पहले ही अपनी प्रेफरेंस क्लियर कर देता है। हर परीक्षा की पहला च्वॉइस IAS, IFS और IPS ही होती है। दोनों परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट के आधार पर परीक्षार्थियों को पोस्ट दी जाती हैं। जिनके सबसे ज्यादा नंबर आते हैं, वो IAS, IFS बनते हैं अगर परीक्षार्थी ने विकल्प चुना है तो।

उसके बाद धीरे-धीरे घटते हुए मार्क्स के साथ आगे की पोस्ट भी मिलती जाती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अगर 100 पोस्ट्स की वैकेंसी है, और उसमें IAS के लिए 30 रिक्तियां हैं, तो टॉप के 30 लोगों को ही IAS मिलेगा. ये भी हो सकता है कि उन टॉप 30 लोगों में से किसी की प्रेफरेंस कुछ और हो. जैसे IPS या IRS. तो ऐसे मेरिट में थोड़ा पीछे रहे लोग अगर अपना प्रेफरेंस IAS रखते हैं तो उन्हें पोस्ट मिल सकती है. इस तरह थोड़ी पीछे के रैंक वाले लोग भी ये ऊपर की सर्विसेज पा सकते हैं।

2018 के रिजल्ट पर एक नजर
रिजल्ट्स अनाउंस होने तक 812 वैकेंसी थीं. जनरल कैटेगरी में जिस आखिर व्यक्ति को IAS की पोस्ट मिली, उसकी रैंक 92 थी. IFS सर्विस मिलने वाले आखिरी व्यक्ति की रैंक जनरल में 134 थी. IPS की पोस्ट के लिए आखिरी रैंकिंग 236 तक गई थी. अगर IAS के लिए जनरल कैटेगरी में 70 रिक्तियां हैं . तो टॉप के 90-95 तक के रैंक वाले भी सामान्य वर्ग में IAS पा सकते हैं. यही चीज IPS, IFS और सभी सर्विसेज के लिए भी लागू होती है।

रैंकिंग पाना क्या इतना मुश्किल है?
यूपीएससी में हर साल कम-ज्यादा रिक्तियां निकाली जाती हैं। साल 2005 में 457 से लेकर 2014 में 1364 रिक्तियां जारी हुई थी। इधर, परीक्षार्थियों की संख्या साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। रिक्तियों के आधार पर ही मेंस और इंटरव्यू देने वाले परीक्षार्थी संख्या तय की जाती है। उदाहरण के लिए 100 वैकेंसी पर 12 से 13 गुना मेन्स एग्जाम के लिए चुने जाएंगे। फिर 250 परीक्षार्थी इंटरव्यू के लिए चुने जाएंगे। फिर इसके बाद फाइनल लिस्ट के लिए चयन किया जाएगा।

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