सीएम योगी का विशेष कार्याधिकारी बन करते थे ठगी, रहते थे रौब में, अफसर भी खाते थे खौफ

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Cm Yogi Osd

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Cm Yogi Adityanath) की छवि को कुछ लोग धूमिल करने के प्रयास में हैं। उनके ओएसडी के नाम पर अधिकारियों को फोन करने वाले दो जालसाजों को पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। मीडिया खबरों के अनुसार, मुख्यमंत्री का ओएसडी बनकर नौकरी, ट्रांसफर, पोस्टिंग और टेंडर दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने वाले दो शातिर जालसाजों को क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। खबरों के अनुसार, वह लोग माननीयों के फर्जी लेटर हेड का इस्तेमाल व सीयूजी सीरीज के नंबरों से फोन करके अफसरों पर अनर्गल काम करने का दबाव बनाते थे।

गिरफ्तार जालसाजों के पास से 1 लाख 58 हजार रुपये की पुरानी करंसी, छह मोबाइल फोन व भारी मात्रा में जाली दस्तावेज बरामद हुए हैं। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि जालसाजों ने खुद को मुख्यमंत्री का निजी सचिव, विशेष कार्याधिकारी बताकर डीएम बांदा और गाजियाबाद के सहायक आयुक्त (वाणिज्य कर) को फोन करके अवैध काम करने का दबाव बनाया था। 1 अक्टूबर को इसकी शिकायत मिलने पर गौतमपल्ली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।

सीएम का विशेष अधिकारी बन ऐंठते थे रकम

सीएम योगी आदित्यनाथ के एक विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के नाम पर प्रदेश में अधिकारियों को फोन कर दबाव बनाने के साथ अर्दब में लेने वाले जालसाज दुर्गेश प्रताप सिंह उर्फ रुसू तथा आलोक दुबे को गौतम पल्ली थाने की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों जालसाज डीएम बांदा के साथ सीडीओ जौनपुर समेत तमाम अफसरों पर दबाव बनाने के लिए ओएसडी के नाम पर फोन करते थे।

यह दोनों जालसाज अफसरों पर ठेका दिलाने से लेकर ट्रांसफर पोस्टिंग का दबाव बनाते थे। इनके पास से छह मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड सहित चलन से बाहर हो चुके 500 व 1000 रुपए के एक लाख 58 हजार रुपया मिला है। इसके साथ सचिवालय प्रवेश पत्र, फर्जी आई कार्ड, समेत तमाम दस्तावेज मिले हैं।

आरोपियों की धर-पकड़ के लिए सीओ दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की टीम गठित की गई थी। शुक्रवार को दोनों जालसाजों को कैबिनेटगंज रेलवे क्रासिंग के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान सुलतानपुर के अखण्ड नगर निवासी आलोक दुबे और दुर्गेश सिंह के रूप में हुई। दुर्गेश प्रताप सिंह लखनऊ में 4/587 विजयंत खंड तथा आलोक दुबे बी-9/12 विकल्प खंड गोमतीनगर में रह रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी का आदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देना पड़ा। सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर दोनों को लखनऊ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

व्हाट्स एप डीपी में राजकीय चिन्ह

मौजूदा समय में दोनों गोमतीनगर के विकल्पखण्ड और विजेन्द्रखण्ड इलाके में रह रहे थे। गैंग के दो सदस्य आजमगढ़ निवासी संजय चतुर्वेदी और अयोध्या के संतोष तिवारी अभी फरार हैं। उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। सीओ दीपक कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों को उत्तर प्रदेश शासन के अंतर्गत आने वाले सभी राजकीय विभागों की जानकारी थी। उन लोगों ने सीयूजी सीरीज के मोबाइल नंबर भी ले रखे थे और इन्हीं नंबरों से अधिकारियों को फोन करते थे।

बातचीत के दौरान वह लोग खुद को सीएम का ओएसडी बताकर अधिकारियों को अर्दब में लेते थे और मनमाफिक काम करवाने का दबाव बनाते थे। अफसर के न-नुकुर करने पर वह लोग मुख्यमंत्री के नाम की धमकी देते थे। सूत्रों की मानें तो आरोपियों ने कुछ अफसरों को झांसे में लेकर उनसे काम भी करवा लिया था। सीओ ने बताया कि ठगों ने व्हाट्स एप डीपी पर शासन के राजकीय चिन्ह की फोटो लगा रखी थी। इससे लोग आसानी से उनके प्रभाव में आ जाते थे।

आलोक और दुर्गेश ने बताया कि वह लोग संविदा नौकरी, तबादला, तैनाती और टेंडर दिलाने के नाम पर लोगों से रुपये वसूलते थे। फिर काम करवाने के लिए अलग-अलग तरीकों से सम्बंधित अधिकारी पर दबाव बनाते थे। उनके पास से भारी मात्रा में जाली आदेश पत्र और आवेदन पत्र बरामद हुए हैं। पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने कई बार पुलिस व आरटीओ अधिकारियों को फोन करके पकड़े गए भारी वाहन भी छुड़वाए थे।

सचिवालय के नाम पर मास्टरमाइंड खेल

इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि फोन पर काम न होने पर आरोपी दूसरा पैंतरा अख्तियार करते थे। वह लोग सांसद, मंत्री व उ.प्र. शासन के जाली लेटर हेड का इस्तेमाल करके सम्बंधित विभाग में सिफारिशी पत्र भेजते थे। उनके पास से 9 जाली लेटर हेड बरामद हुए हैं। इसके अलावा आरोपियों ने सचिवालय के फर्जी परिचय पत्र भी बनवा रखे थे। सभी दस्तावेजों की जांच कराई जा रही है।

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