fbpx
Home सफलता सांवले रंग को लेकर मारे ताने, बेटी जनने पर घर से निकाला,...

सांवले रंग को लेकर मारे ताने, बेटी जनने पर घर से निकाला, जज बन अब बो बहू सुनाएगी फैसला

0
1904
Success Story Of Vandana Madhukar

लोग कहते हैं न कि लड़कियां, लड़कों से कमजोर नहीं हैं- सही कहते हैं। आज के जमाने की लड़कियां लड़कों से किसी भी मायने में कम नहीं हैं। हर फील्ड में लड़कियां आगे बढ़कर लड़कों को टक्कर दे रही हैं। महिलाएं आज आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ समाज के लिए भी एक मिसाल पेश कर रही हैं। लेकिन इस समाज में आज भी कई ऐसे लोग हैं, जो महिलाओं को कम आंकते हैं और उन्हें उनके रंग रूप को लेकर प्रताड़ित करते हैं। लेकिन लड़कियों को कम आंकना मंद बुद्धि का प्रमाण है।

पटना की वंदना (Vandana) इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। जिस बहू को ससुरालवालों ने उसके सांवले रंग को लेकर ताने मारे और बेटी जनने पर घर से निकाल दिया, वही बहू राज्य ज्यूडिशियरी की परीक्षा पास कर जज बन गई है। ससुराल से निकाले जाने के बाद संघर्ष और मजबूत हौसले की बदौलत उड़ान भरने वाली पटना के छज्जूबाग की 34 वर्षीय वंदना मधुकर (Vandana Madhukar) माता-पिता के साथ पूरे मोहल्ले की अब चहेती बन गई है। वंदना ने नौकरी करते हुए बेटी को पाला और उच्चस्तर की पढ़ाई जारी रखी।

सांवले रंग के साथ लड़की का जन्म

मीडिया खबरों के अनुसार, वंदना का मायका मोकामा के राम शरण टोला में है। वंदना की शादी साल 2015 में पटना में हुई। जब शादी हुई थी तो वह मोकामा में नियोजित शिक्षक थी। शादी के बाद वंदना ने पटना आकाशवाणी में ट्रांसमिशन एग्जिक्यूटिव का पद संभाला। इसके बाद से घर में कलह बढ़ गई। ससुराल वाले और पति पूरी सेलरी घर में देने के लिए कहने लगे और समय समय पर इस विषय को लेकर वंदना को प्रताड़ित करना सुरु कर दिया।

वंदना ने बताया कि शादी के एक साल बाद उसे बेटी हुई, जिसके बाद ससुराल वाले उसके सांवले रंग के साथ लड़की को जन्म के लिए ताने देने लगे। इतना ही नहीं ससुराल की प्रताड़ना की इंतहा इस कदर बड़ी कि अगले बच्चे के जन्म से पहले चेकअप कराने की बाते तक करने लग गए। यानी अगली बार गर्भवती होने पर चेकअप कराना होगा और फिर लड़की हुई तो गर्भपात।

जज बनकर सुनाएगी फैसला

ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर वंदना को अपनी 20 दिन की बेटी को लेकर ससुराल छोड़कर मायके आना पड़ा। मायके आकर उनकी मुलाकात बाढ़ कोर्ट के वकील मधुसूदन शर्मा से हुई। जिन्होंने उन्हें जज की परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया। वंदना के प्रेरणस्रोत मधुसूदन ने हर संभव मदद का भरोषा दिया, साथ ही साथ जज परीक्षा के लिए प्रेरित किया।

जिसके बाद उन्होंने इसकी तैयारी की और 29 नवंबर को बिहार की न्यायिक परीक्षा पास कर ली और वो जज बन गईं। वंदना अपनी उपलब्धि का श्रेय पिता किशोरी प्रसाद और माता उमा प्रसाद के साथ मधुसूदन शर्मा को देती हैं। उनका कहना है कि जज की कुर्सी पर बैठने के साथ ईमानदारी से कार्य और पीडि़तों को त्वरित न्याय देना उनकी प्राथमिकता होगी।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here