पिता के साथ खेतों में किया करती थी काम, ऐसे बनी UPSC टॉपर

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Success Story of farmer's daughter Priyanka Dewan
Success Story of farmer's daughter Priyanka Dewan

नई दिल्ली, आज हम आपको उत्तराखंड के चमोली जिले की रहने वाली प्रियंका दीवान के बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यूपीएससी की परिक्षा में पहले प्रयास में ही 297 रैंक पाकर अपने परिवार और जिले का नाम रौशन किया है। चार अगस्त को यूपीएससी का रिजल्ट जारी किया गया है। प्रियंका दीवान उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के रामपुर गांव में रहने वाली एक मध्यम वर्गीय परिवार से आती हैं।

Priyanka Dewan Success Story
Priyanka Dewan Success Story

उनके पिता राम दीवान गांव में ही किसानी करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि प्रियंका किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ पाती। ऐसे में वो प्रियंका दीवान ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही स्कूल से की। अक्सर स्कूल के लौटने के बाद वो पिता की मदद के लिए खेतों पर उनके से काम करने जाया करती थी। दसवीं में अच्छे नंबर लाने के बाद लोगों ने प्रियंका के पिता से कहा कि उन्हें अपनी बेटी को अच्छे स्कूल में भेजना चाहिए।

प्रियंका के पिता पढ़ाई का महत्व समझते थे। इसलिए उन्होंने अपनी बेटी का रास्ता आसान करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया। फलस्वरूप ग्रेजुएशन के लिए प्रियंका गोपेश्वर गईं। इसी दौरान एक दिन चमोली जिले के डीएम एसए मुरुगेशन उनके कॉलेज के दौरे पर आए। उनके स्वागत के लिए जिस तरह से पूरे कॉलेज परिसर को सजाया गया था। उन्होंने प्रियंका दीवान को प्रभावित किया, जिसके बाद प्रियंका दीवान ने भी अफसर बनने की ठान ली।

Success Story of UPSC Topper Priyanka Dewan
Success Story of UPSC Topper Priyanka Dewan

प्रियंका दीवान बताती हैं कि इसके बाद से ही उन्होंने मन ही मन तय कर लिया था कि वो यूपीएससी पास करेंगी। कड़ी मेहनत के बाद प्रियंका दीवान अपने सपने को पूरा करने में सफल रहीं। खास बात यह है कि उन्होंने यूपीएसी परिक्षा को पहले ही प्रयास में क्लियर कर लिया। प्रियंका दीवान आगे बताती हैं कि यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद वह दो दिनों तक अपने परिवार को यह खुशखबरी नहीं दे पाई थीं।

दरअसल वो इन दिनों देहरादून के एक कॉलेज से वकालत की पढ़ाई कर रही हैं और उनका परिवार 145 किमी दूर रामपुर गांव में हैं। कथित तौर पर गांव में न तो उचित सड़क है, न ही बिजली की आपूर्ति और न ही मोबाइल कनेक्टिविटी। टीओआई के अनुसार जब उनके पिता दीवान राम को पता चला कि उनकी बेटी ने UPSC में 257 वीं रैंक हासिल की है, तो खुशी से उनकी आंखें में आंसू आ गए थे।

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