Yashasvi Jaiswal: भूूखे पेट गुजारी रातें, तो कभी सड़को पर बेचे गोलगप्पे, अब IPL ने बदली किस्मत और बना करोड़पति

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success story of Cricketer Yashasvi Jaiswal Hindi

Success Story Of Yashasvi Jaiswal: यशस्वी जायसवाल (Yashasvi ) एक ऐसा नाम जिन्होंने कामयावी की एक नई विरासत लिखी है।

कोलकाता में गुरुवार को हुई आईपीएल नीलामी में मुंबई की तरफ से खेलने वाले उत्तर प्रदेश के युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को राजस्थान रॉयल्स ने खरीदा है।

इसी के साथ यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal) व उनके परिवार का वर्षो पुराना सपना हकीकत बन गया।

Success Story Of Cricketer Yashasvi Jaiswal Hindi
क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल (Image Source: Social Media)

बुरे वक्त से गुजकर जब कोई शख्स कामयाबी हासिल करता है तो पूरी दुनिया हैरान रह जाती है पर उसे उतनी नहीं होती। शायद वो जानता है कि अगर मैने इस मुकाम को हासिल किया तो इसके लिए कई मुश्किलों को भी पार किया। भारतीय अंडर-19 टीम में शामिल हुए क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल की कहानी (Story of Yashasvi Jaiswal) भी कुछ ऐसी ही है।

यूं तो भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket Team) में उभरते हुए युवा सितारों में कई नाम चर्चित हैं। भारत की अंडर 19 क्रिकेट टीम के कप्तान प्रियम गर्ग (Cricketer Priyam Garg), ध्रुव चंद जुरेल (Cricketer Dhruv Chand Jurel) और यशस्वी जायसवाल (Cricketer Yashasvi Jaiswal) का नाम खूब सुर्खियां भी बटोर रहा है। लेकिन यशस्वी जायसवाल कई खास कारणों से खेल प्रेमियों का दिल और ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।

गुरुवार को आईपीएल नीलामी में जब 20 लाख रुपये बेस प्राइज वाले इस खिलाड़ी को राजस्थान रॉयल्स ने जब 2.4 करोड़ रुपये की बोली लगाकर अपने खेमे में किया तो एक बार फिर उनके संघर्षों की याद ताजा हो गई।

IPL Auction 2020 (Image Source: Social Media)

आपको बता दे, आईपीएल नीलामी में मुंबई के युवा क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल (Cricketer Yashasvi Jaiswal) का बेस प्राइज बीस लाख रुपए था। Kings XI ने इस बल्लेबाज के लिए 80 लाख और केकेआर ने 1.9 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी।

वहीं, जब राजस्थान रॉयल्स की बोली 2 करोड़ पहुंच गई तो केकेआर ने पांव खींच लिए। आखिर में राजस्थान रॉयल्स ने यशस्वी जायसवाल को 2.4 करोड़ रुपये में खरीद लिया।

संघर्ष से सफलता का नाम यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal)

Image Source: Social Media

दो भाइयों में छोटा यशस्वी उत्तर प्रदेश के भदोही का रहने वाला है। उसके पिता वहीं एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। यशस्वी, कम उम्र में ही क्रिकेट का सपना लेकर मुंबई पहुंच गया था।

उनके पिता के लिए परिवार को पालना मुश्किल हो रहा था इसलिए उन्होंने एतराज़ भी नहीं किया। मुंबई में यशस्वी के चाचा का घर इतना बड़ा नहीं था कि वो उसे साथ रख सकें। इसलिए चाचा ने मुस्लिम यूनाइटेड क्लब से अनुरोध किया कि वो यशस्वी (Yashasvi) को टेंट में रहने की इजाज़त दें।

यशस्वी मुंबई के मुस्लिम यूनाइटेड क्लब के गार्ड के साथ तीन साल तक टेंट में रहा। यशस्वी इससे पहले डेयरी में काम करता था जहां उसने भूखे पेट कई रातें गुजारीं लेकिन वहां से उसे भगा दिया गया। यशस्वी उस वक्त 11 साल का था।

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यशस्वी जायसवाल अपने कोच ज्वाला सिंह के साथ (Source: Social Media)

यशस्वी ने ये मुश्किल वक्त सिर्फ एक सपने के सहारे काट लिया और वो सपना था एक दिन भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलना।

अगले तीन साल के लिए वो टेंट ही यशस्वी के लिए घर बन गया। पूरी कोशिश यही होती कि मुंबई में उनकी संघर्ष से भरी ज़िंदगी की बात मां-बाप तक नहीं पहुंचे। अगर उनके परिवार को पता चलता तो क्रिकेट करियर का वहीं अंत हो जाता।

उनके पिता कई बार पैसे भेजते लेकिन वो कभी भी काफी नहीं होते। राम लीला के समय आज़ाद मैदान पर यशस्वी ने गोल-गप्पे भी बेचे। लेकिन इसके बावजूद कई रातों को उन्हें भूखा सोना पड़ता था।

सड़क पर बेचे गोलगप्पे

कम ही लोग जानते हैं कि मुश्किल वक्त में यशस्वी अपना खर्च चलाने के लिए मुंबई के आजाद मैदान पर पानी-पूरी बेचते थे। यशस्वी का यह चुनौती भरा सफर आसान नहीं था।

इस बारे में यशस्वी ने एक बार कहा था, ‘मुझे यह अच्छा नहीं लगता था क्योंकि जिन लड़कों के साथ मैं क्रिकेट खेलता था, जो सुबह मेरी तारीफ करते थे, वही शाम को मेरे पास गोलगप्पे खाने आते थे। यशस्वी ने कहा कि उन्हें ऐसा करने पर बहुत बुरा लगता था लेकिन उन्हें यह करना पड़ा क्योंकि उन्हें जरूरत थी।’

11 साल की उम्र में यशस्वी आए मुंबई

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Image Source: Social Media

साल 2013 में यशस्वी तब सिर्फ 11 साल के थे, जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के छोटे से जिले भदोही से मुंबई तक का सफर किया। तब उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं थी।

एक इंटरव्यू में यशस्वी ने बताया, ‘मैं सिर्फ यही सोचकर आया था कि मुझे बस क्रिकेट खेलना है और वह भी सिर्फ और सिर्फ मुंबई से।’ यशस्वी ने बताया था कि जब एक टेंट में रहते हैं तो आपके पास बिजली, पानी, बाथरूम जैसी सुविधाएं भी नहीं होती थी। सभी खिलाड़ी अपने घर से खाना लाते और मुझे टेंट से दो समय का खाना मिलता था। लेकिन कई बार भूखे भी सोना पड़ा क्योंकि खुद रोटियां बनानी पड़ती थीं।

अंडर 19 एशिया कप में बिखेरा था जलवा

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यशस्वी- फोटो : social media

यशस्वी ने इस साल घरेलू क्रिकेट में जबरदस्त प्रदर्शन किया था, उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी 2019 में मुंबई की तरफ से खेलते हुए एक दोहरा शतक सहित तीन शतकों की मदद से पांच मैचों में 500 से अधिक रन बनाए थे। उन्होंने इसी साल झारखंड के खिलाफ 149 गेंदों में अपना पहला दोहरा शतक लगाया और सबसे कम उम्र में ऐसा करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए।

इतना ही नहीं वे विजय हजारे ट्रॉफी की एक पारी में सबसे ज्यादा 12 छक्के लगाने वाले खिलाड़ी भी बने थे।

अर्जुन तेंदुलकर और यशस्वी जायसवाल की दोस्ती

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यशस्वी- फोटो : social media

सचिन के बेटे अर्जुन तेंदुलकर (Arjun Tendulkar) और यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal) दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं। इन दोनों की दोस्ती बेंगलुरु में स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में हुई थी। उस वक्त अर्जुन और यशस्वी दोनों एक ही कमरे में रहते थे। एक बार अर्जुन ने यशस्वी की मुलाकात अपने पिता (Sachin Tendulkar) से करवाई थी।

वे साल 2018 में यशस्वी को अपने घर ले गए और उन्हें सचिन तेंदुलकर (Sachin) से मिलवाया जिसके बाद मास्टर ब्लास्टर (Master Blaster Sachin Tendulkar) भी उनके फैन हो गए। पहली ही मुलाकात में सचिन ने यशस्वी (Yashasvi Jaiswal) से प्रभावित होकर उन्हें अपना बल्ला गिफ्ट में दे दिया। यही नहीं सचिन ने यशस्वी से अपने डेब्यू मैच में उसी बल्ले से खेलने की गुजारिश भी की।

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यशस्वी- फोटो : social media

यशस्वी (Yashasvi Jaiswal) की एक और बड़ी बात यह है कि उन्होंने इतने दर्द सिर्फ इसलिए सहे ताकि बह अपने सपनो को पूरा कर हकीकत को अंजाम दे सके। आज बह उन्होंने कर दिखाया।

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