20 सालों से गौशाला में सेवा कर रहे हैं खान चचा, खुद सुनाई हिन्दू संग संबधों की कहानी

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देश में आजादी के बाद से हिंदू-मुस्लिम धर्म का मुद्दा हमेशा से विवादों में रहा है। धर्म के ढांचे पर बैठी देश की राजनीति से लेकर रणनीति हर बार कोई नई कहानी बयां करती है, लेकिन ऐसे में आज हम आपको एक ऐसी कहानी बता रहे हैं जिसे Humans of Bombay ने शेयर किया है। यह कहानी खान चचा की है। खान चचा बीते 20 सालों से राजस्थान के जैसलमेर में गौशाला में काम कर रहे हैं।

Image Source- Humans of Bombay(instagram)

दरअसल साल 2000 में राजस्थान के जैसलमेर में खान चाचा काम की तलाश में पहुंचे थे। वह एक साल तक काम की तलाश करते रहे, लेकिन उन्हें कहीं भी काम नहीं मिला। इसके बाद उन्हें एक गौशाला के बारे में पता चला, जहां एक हेल्पर की वैकेंसी खाली थी। नौकरी का पता चलते ही खान चाचा वहां पहुंच गए।

खान चाचा ने गौशाला में नौकरी के लिए बात की। हालांकि इससे पहले उन्हें कभी गौशाला में काम करने का कभी भी कोई तजुर्बा नहीं था, लेकिन नौकरी उनकी पहली जरूरत थी। ऐसे में उन्होंने ठान लिया कि वह यह नौकरी करके रहेंगे। खान चाचा इस गौशाला में नौकरी करने वाले पहले मुस्लिम शख्स थे। हालांकि इस बात का एहसास ना कभी खान चाचा को हुआ और ना ही कभी उन्हें इस बात का किसी दूसरे काम करने वाले ने कराया।

Image Source- Humans of Bombay(instagram)

खान चाचा का कहना है कि यहां हम सब लोग भाइयों की तरह एक साथ रहते हैं और एक साथ काम करते हैं। हम सुबह 6:00 बजे अपना काम शुरू करते हैं। इस दौरान सबसे पहले हम गाय को रोटी खिलाते हैं और फिर दूध निकालते हैं। चाचा ने बताया कि उन्होंने 1500 रुपए में यह नौकरी शुरू की थी। उनके परिवार में 11 लोग थे। धीरे धीरे बढ़ते कारोबार के साथ गायों की संख्या बढ़ती गई।

खान चाचा का कहना है कि यह गाय उनके जीवन में उनके परिवार की तरह ही है। वहीं दूसरी ओर खान चाचा ने बताया कि गौशाला में काम करने से मिलने वाली तनख्वाह से उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाया। उनकी शादी की। 50 की उम्र में उनकी सभी जिम्मेदारियां पूरी हो गई। इसके बाद उन्होंने हज जाने के लिए पैसे भी जोड़े, लेकिन साल 2019 में एक हादसे में उनके बेटे की मौत हो गई।

Image Source- Humans of Bombay(instagram)

बेटे की मौत के बाद उनके दोनों बच्चों की जिम्मेदारी खान चचा पर आ गई। बच्चों की पढ़ाई का सारा खर्च उन पर आ गया। इन मुश्किल हालातों में गौशाला में काम करने वाले दूसरे कर्मचारियों ने उनकी खुले दिल से मदद की। दूसरे कर्मचारियों को जब खान चचा के परिवार की आर्थिक स्थिति का पता चला तो सभी ने मिलकर 30,000 रूपये का बंदोबस्त किया और खान चाचा को दिए।

Image Source- Humans of Bombay(instagram)

चचा बताते हैं कि यह सब देखकर मेरी आंखें नम हो गई और मैं आज यही सोचता हूं कि अगर मैं उन लोगों के लिए कुछ पर पाऊं तो अपने आप को खुशनसीब समझूंगा। खान चाचा की यह कहानी आज उन लोगों के लिए मिसाल है जो धर्म के नाम पर कटाक्ष, लड़ाई या उन्माद करते हैं।

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