पिता के बाद भाई को खोया लेकिन हौसला नहीं खोया, अफसर बनकर पूरा किया परिवार का सपना

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एक पिता अक्सर यही सोचता है, कि उसकी औलाद उससे भी बड़ा मुकाम हासिल करे। ऐसा ही एक सपना देखा था साधना चौहान के पिता ने। पिता चाहते थे कि बेटी उनसे बड़ी अफसर बने और नीली बत्ती बाली गाड़ी में बैठ कर घर आये। मगर नियति को सायद कुछ और ही मंजूर था, बेटी के अफसर बनने से पहले ही बह इस दुनिया को छोड़कर चले गए।

साधना चौहान की मेहनत और लगन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि जो पिता उनके लिए सपने बुन रहा था उसका साया एका-एक सर से हट गया, और उसके कुछ समय बाद भाई का भी निधन हो गया। पिता के बाद भाई को खोया लेकिन साधना चौहान ने हौसला नहीं खोया। यही मजबूत हौसला था जिसकी बदौलत उन्‍होंने अफसर बनकर पिता का सपना पूरा कर दिखाया।

आज बेटी के लिए सपना देखने बाले पिता जंहा भी होंगे, उन्हें अपनी बेटी पर गर्व हो रहा होगा।

साधना चौहान का प्रेरणादायी जीवन

आपकी जानकारी के लिए बता दे, साधना चौहान ने अपने पापा के सपने को पूरा करने के लिए 2002 में सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी शुरु की थी। तैयारी के दौरान 2004 में उनके पिता की मृत्यु हो गई। घर की सबसे बड़ी होने के नाते ‌सारी जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई, लेकिन उन्होंने कभी अपना हौसला नहीं ‌डगमगाने दिया और तैयारी जारी रखी।

मेहनत और दृढ़निश्चय के बल पर साधना चौहान ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा में सफर होकर एक अलग मिसाल पेश की। उन्‍होंने साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों से भी सफलता पाई जा सकती है।

इनके ऊपर दुखों का पहाड़ तब और टूटा जब पिता को खोने के बाद 2012 में भाई की भी मृत्यु हो गई। हजारों मुसीबते झेलने के बाद इन्होंने अपनी तैयारी जारी रखते हुए पीसीएस परीक्षा में कामयाबी हासिल की।

साधना चौहान एक ऐसी व्यक्तित्व रही हैं, जो अपने पिता एवं भाई को खाने के बाद भी अपने लक्ष्य से नहीं भटकीं और लगातार कोशिश से 2006 एवं 2009 में साक्षात्कार तक पहुंचीं। उनकी इन्हीं कोशिशो ने सफलता पाने में मदद दिलाई।

असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनाती

साधना इन दिनों जीएसटी विभाग (पूर्व में सेल्स टेक्स विभाग) में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। वह गाजियाबाद के अतरौली गांव की रहने वाली हैं। सन् 2002 में उन्‍होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। उनके पापा ने दिल्ली के बाजीराव रवि कोचिंग संस्थान में दाखिला कराया था लेकिन 2004 में पिता का निधन हो गया। घर की जिम्मेदारी साधना के ही ऊपर आ गई थी।

पिता के निधन के बाद हिम्‍मत नहीं हारी। पिता फूड इंस्पेक्टर थे और चाहते थे कि मैं उनसे बड़ी अफसर बने। पापा के जाने के बाद 2012 में भाई को खोया तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक बार तो हिम्‍मत ने भी जवाब दे दिया। घर में मैं, मां और एक भाई थे।

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