सफाई कर्मचारी का बेटा बना सेना में अधिकारी! जिन्होंने उड़ाया था मजाक, वो आज दे रहे बधाई

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पहली तस्वीर सांकेतिक है, दूसरी तस्वीर सुजीत चंदौली की है

बिजेंद्र कुमार की आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कान थी, जब शनिवार को वह 21 साल के बेटे सुजीत को देहरादून के इंडियन मिलिट्री अकैडमी (IMA) से ग्रेजुएट होते देख रहे थे। सालो पहले जो सपना उन्होंने देखा था, आज उनका बेटा उसे साकार कर रहा था।

उत्तर प्रदेश के चंदौली के सफाई कर्मचारी ने भी दस साल पहले कुछ ऐसा ही सपना देखने की हिम्मत की थी। हमेशा की तरह लोगों ने उसके सपने को भी औकात से बाहर बताया और उसपर हंसे लेकिन उस सफाई कर्मचारी ने हार नहीं मानी। आज उसी सफाई कर्मचारी का बेटा जब भारतीय सेना में अधिकारी बना तो पूरा गांव उसे बधाई दे रहा है।

सुजीत चंदौली के बसीला गांव से भारतीय सेना में अधिकारी बनने वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं। सुजीत अपने छोटे भाई-बहनों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। वे सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हैं।

पिता ने देखा सपना, बेटे ने पूरा किया

वाराणसी में पोस्टेड पिता बिजेंद्र ने कहा-

‘मैंने झाड़ू उठाई लेकिन मेरा बेटा अब बंदूक लेकर देश की सेवा करेगा। वह सेना में अधिकारी बनेगा।’

मैं अपने तीन बच्चों को लेकर वाराणसी में ही रहता हूं, जिससे उन्हें पढ़ाई की बेहतर सुविधाएं मिल सके। मेरी पत्नी गांव में अकेले ही रहती हैं। वह आशा कार्यकर्ता हैं। हम बीच में गांव आते-जाते रहते हैं लेकिन यह तय कर लिया है कि बच्चों को बेहतर करियर देने के लिए जितना संभव होगा, उतना करूंगा।

लोगो ने मजाक बनाया, कुछ ने तो ये नसीहत भी दी थी कि ‘इतना बड़ा मत सोचो.’ लेकिन इस जुनूनी पिता ने ना किसी की नसीहत पर गौर किया और ना ही किसी द्वारा हंसी उड़ाए जाने की परवाह की। अपने बड़े बेटे को पढ़ाई के लिए राजस्थान भेजा, उसे सेना का अधिकारी बनाने के लिए जी जान लगा दी।

शनिवार यानी 12 जून को बिजेंद्र का एक सपना तब पूरा हुआ जब उन्होंने अपने 21 वर्षीय बेटे सुजीत को देहरादून के इंडियन मिलिट्री अकैडमी (IMA) से ग्रेजुएट होते हुए देखा। हालाँकि, सुजीत का परिवार पासिंग आउठ पैरेड देखने के लिए टीवी से चिपका रहा। कोविड गाइडलाइन्स की वजह से कैडेट्स के परिजन को समारोह में शिरकत करने की इजाजत नहीं मिली।

पूरे गांव का नाम किया रौशन

भारतीय सेना में अधिकारी बनने के साथ ही सुजीत चंदौली के बसीला गांव से ऐसी उपलब्धि प्राप्त करने वाले वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं। वह आर्मी ऑर्डिेनेंस कॉर्प्स जॉइन करेंगे। सुजीत को उम्मीद है कि उनकी इस उपलब्धि से गांव और क्षेत्र के अन्य युवाओं में भी सेना की वर्दी पहनने की इच्छा बलवती होगी।

बिजेंद्र अपने बड़े बेटे सुजीत की तरह ही अपने अन्य बच्चों को भी खूब पढ़ाना चाहते हैं। सुजीत के अलावा बिजेंद्र के तीन बच्चे और हैं, जिसमें उनका छोटा बेटा आईआईटी में पढ़ना चाहता है, वहीं उनकी एक बेटी डॉक्टर तो दूसरी आईएएस अधिकारी बनना चाहती है।

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