ये है प्रभु श्रीराम के वंसज, महाराजा भवानी सिंह कुश की 307वीं पीढ़ी, सबूत में दिखाए 3 दस्ताबेज

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Lord Rama vansabali

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। 9 अगस्त को कोर्ट ने रामलला के वकील से पूछा था- क्या भगवान राम का कोई वंशज अयोध्या या दुनिया में है? इस पर वकील ने कहा था- हमें जानकारी नहीं। अब इसी सवाल के जवाव में एक नया मोड़ आया है, मोड़ भी ऐसा जिसने लोगो को आश्चर्य चकित कर रखा है। बता दे इस जवाव का नया मोड़ सूत्रधार और कोई नहीं बल्कि प्रभु श्री राम के वंसज है। अरे चौकिये मत, आपने विल्कुल सही पढ़ा, अयोध्या नरेश प्रभु श्री राम के वंसज।

जी हां, राजस्थान के एक राजसी परिवार ने दावा किया है, कि बह प्रभु श्री राम के वंसज है। जयपुर के राजपरिवार का कहना है कि हम भगवान राम के बड़े बेटे कुश के नाम पर ख्यात कच्छवाहा/कुशवाहा वंश के वंशज हैं। यह बात इतिहास के पन्नों में दर्ज है, और उनकी 310वीं पीढ़ी हैं। उनके मुताबिक अगर सुप्रीम कोर्ट उनसे सबूत मांगता हैं तो वे कोर्ट को इसके दस्तावेज देने को तैयार हैं। बता दे, इसके लिए उन्होंने बाकयदा सबूत भी मीडिया के सामने पेश किया है।

ये है प्रभु श्री राम के वंसज

प्रभु श्री राम के वंसज का दावा करने बाला परिवार जयपुर राजघराने से ताल्लुक रखता है। जयपुर के राजपरिवार का कहना है कि हम भगवान राम के बड़े बेटे कुश के नाम पर ख्यात कच्छवाहा/कुशवाहा वंश के वंशज हैं। यह बात इतिहास के पन्नों में दर्ज है। पूर्व राजकुमारी दीयाकुमारी ने बताया कि जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह भगवान राम के बड़े बेटे कुश के 289वें वंशज थे।

जयपुर राजघराने के पूर्व राजकुमारी दियाकुमारी (Image Source- Social Media)

इसके एवज में पूर्व राजकुमारी दीयाकुमारी ने इसके कई सबूत भी दिए हैं। उन्होंने एक पत्रावली दिखाई है, जिसमें भगवान श्रीराम के वंश के सभी पूर्वजों का नाम क्रमवार दर्ज हैं। इसी में 289वें वंशज के रूप में सवाई जयसिंह और 307वें वंशज के रूप में महाराजा भवानी सिंह का नाम लिखा है। इसके अलावा पोथीखाने के नक्शे भी हैं। मीडिया खबरों के अनुसार, उनके पास एक पत्रावली है, जिसमें भगवान श्रीराम के वंश के सभी पूर्वजों का नाम क्रमवार दर्ज हैं।

Image Source- Social mediya

साथ ही उनके पास 9 दस्तावेज, 2 नक्शे रखे हैं जो साबित करते हैं कि अयोध्या के जयसिंहपुरा और राम जन्मस्थान सवाई जयसिंह द्वितीय के अधीन ही थे। 1776 के एक हुक्म में लिखा था कि जयसिंहपुरा की भूमि कच्छवाहा के अधिकार में हैं। भगवान श्री राम के कुशवाहा वंश के 63वें वंशज थे। इसी तरह पूर्व राजकुमारी दीयाकुमारी भगवान श्री राम की 310वीं पीढ़ी है।

ये है श्री राम की वंशावली

मीडिया खबरों के अनुसार, राजकुमारी के मुताबिक- कच्छवाहा वंश काे भगवान राम के बड़े बेटे कुश के नाम पर कुशवाहा वंश भी कहा जाता है। इसकी वंशावली के मुताबिक 62वें वंशज राजा दशरथ, 63वें वंशज श्री राम, 64वें वंशज कुश थे। 289वें वंशज आमेर-जयपुर के सवाई जयसिंह, ईश्वरी सिंह और सवाई माधाे सिंह और पृथ्वी सिंह रहे। भवानी सिंह 307वें वंशज थे।

राजकुमारी दियाकुमारी द्वारा दिखाई गई श्री राम वंशावली

सिटी पैलेस के पाेथीखाना में रखे 9 दस्तावेज और 2 नक्शे साबित करते हैं कि अयाेध्या के जयसिंहपुरा और राम जन्मस्थान सवाई जयसिंह द्वितीय के अधीन थे। प्रसिद्ध इतिहासकार आर नाथ की किताब द जयसिंहपुरा ऑफ सवाई राजा जयसिंह एट अयाेध्या के एनेक्सचर-2 के मुताबिक अयाेध्या के रामजन्म स्थल मंदिर पर जयपुर के कच्छवाहा वंश का अधिकार था।

वंसज ने बनवाया अयोध्या में मंदिर

1776 में नवाब वजीर असफ- उद- दौला ने राजा भवानी सिंह को हुक्म दिया था कि अयोध्या और इलाहाबाद स्थित जयसिंहपुरा में कोई दखल नहीं दिया जाएगा। ये जमीनें हमेशा कच्छवाहा के अधिकार में रहेंगी। औरंगजेब की मृत्यु के बाद सवाई जयसिंह द्वितीय ने हिंदू धार्मिक इलाकों में बड़ी-बड़ी जमीन खरीदीं। 1717 से 1725 में अयोध्या में राम जन्मस्थान मंदिर बनवाया था। साथ ही सरयू नदी जहां श्री राम ने समाधी ली थी, वहीं पूजा भी कराई थी।

सिटी पैलेस के पाेथीखाना में रखे 9 दस्तावेज और 2 नक्शे साबित करते हैं कि अयाेध्या के जयसिंहपुरा और राम जन्मस्थान सवाई जयसिंह द्वितीय के अधीन थे। प्रसिद्ध इतिहासकार आर नाथ की किताब द जयसिंहपुरा ऑफ सवाई राजा जयसिंह एट अयाेध्या के एनेक्सचर-2 के मुताबिक अयाेध्या के रामजन्म स्थल मंदिर पर जयपुर के कच्छवाहा वंश का अधिकार था।

कोर्ट दस्तावेज मांगेगा तो जरूर देंगे

दीया कुमारी ने कहा कि हमने कभी आगे बढ़कर किसी से नहीं कहा कि हम श्री राम के वंशज हैं। राजघराने की सदस्य दीयाकुमारी का कहना है- दुनियाभर में भगवान राम के वंशज हैं। इसमें हमारा परिवार भी शामिल है, जो भगवान राम के बेटे कुश का वंशज है। ये इतिहास की खुली किताब की तरह है। लेकिन अगर कोर्ट हमसे इसे प्रमाणित करने को कहेगा तो हम कोर्ट को दस्तावेज उपलब्ध जरूर कराएंगे।

उन्होंने कहा कि पूरे देश की जनता कि तरह हम भी चाहते हैं कि राम मंदिर मामले की सुनवाई तेजी से हो और इस पर कोर्ट जल्द अपना फैसला सुनाए। भगवन श्री राम लोगो की आस्था के प्रीतक है। इसलिए बेहतर होगा वंशावली से ज्यादा लोगो की आस्था का ख्याल रखा जाए, और सुप्रीम कोर्ट इस पर जल्द से जल्द अपना फैसला सुनाये।

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