करीमउल हक: यह इंसान नहीं फरिश्ता है फरिश्ता, अबतक 5000 लोगो की बचा चुके है जान

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पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से जलपाईगुड़ी के बीच की दूरी तकरीबन 52 किलोमीटर है। बंगाल फतह करने को भाजपा पूरा जोर लगा रही है। पीएम मोदी सूबे में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं। शनिवार को जब वे सिलीगुड़ी के बागडोगरा एयरपोर्ट पर उतरे तो उनके स्वागत के लिए वहां एक खास शख्स मौजूद था।

पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रचार के लिए सिलीगुड़ी पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी बागडोगरा के हवाई अड्डे पर उतरे। प्लेन से उतरते ही उन्होंने एक व्यक्ति को गले लगा लिया। जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हो गई।

बाइक एंबुलेंस दादा के रूप में मशहूर

पीएम मोदी जलपाईगुड़ी पहुंचे और यहां बागडोगरा हवाईअड्डे पर उतर कर पीएम मोदी पद्म पुरस्कार विजेता करीमउल हक से मिले, जहां दोनों एक-दूसरे के गले लगे। समाज सेवा करने वाले करीमउल हक को पश्चिम बंगाल में बाइक एम्बुलेंस दादा के नाम से जाना जाता है, यह अब तक 400 लोगों की जान बचा चुके हैं।

करीमउल हक गरीब और जरूरतमंद लोगों को अपनी मुफ्त बाइक एम्बुलेंस के जरिए असप्ताल तक पहुंचाते हैं। करीमउल की जिंदगी की कहानी कई लोगों को प्रेरित कर सके इसके लिए एक किताब भी लिखी जा चुकी है।

जिसका नाम है- ‘बाइक एम्बुलेंस दादा, द इंस्पायरिंग स्टोरी ऑफ करीमुल हक: द मैन हू सेव्ड 4000 लाइव्स’ . यह इनकी ऐधिकारिक बायोग्राफी है. जिसके लेखक बिस्वजीत झा है। उनकी सेवाओं का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें पद्मश्री अवॉर्ड देकर सम्मानित किया था।

ऐसे आया बाइक एंबुलेंस का आइडिया

बता दें कि लगभग 26 साल पहले हक की मां की मृत्यू हो गई थी और उनकी मां की मौत का कारण था उनकी गरीबी, तब वह एम्बुलेंस का खर्चा उठाने में असमर्थ थे। और उनकी बीमार मां को अस्पताल तक ले जाने के लिए कोई साधन नहीं था।

करीमुल हक चाय बागान में काम कर रहे थे, तभी उनके एक साथी की तबियत अचानक खराब हो गई और वह निढ़ाल होकर गिर पड़ा। उन्होंने एंबुलेंस को फोन किया लेकिन उसे आने में काफी वक्त लग रहा था।

इसे देखते हुए करीमुल हक ने साथी को अपनी पीठ से बांधा और तीसरे साथी की मदद से बाइक चलाकर करीब 45 किमी दूर अस्पताल ले गए। जिससे उसकी जान बच गई। इससे उन्हें बाइक एंबुलेंस शुरू करके लोगों की सेवा करने का आइडिया आया।

5 हजार लोगो की बचा चुके हैं जान

करीमुल हक की बाइक एंबुलेंस अब इलाके में मशहूर हो चुकी है। जिन इलाकों में वे काम करते हैं, वहां पर सड़कों की हालत बहुत खराब है। ऐसे में वहां समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। ऐसे में कोई भी गंभीर स्थिति आने पर लोग करीमुल हक को मदद के लिए कॉल करते हैं और वे तुरंत बाइक लेकर उनके घर पहुंच जाते हैं।

हक के मुताबिक वे अब तक करीब 5,000 मरीजों की जान बचा चुके हैं। फ्री बाइक एंबुलेंस सर्विस देने के अलावा वे गांव वालों को फ्री फर्स्ट ऐड की ट्रेनिंग का कार्यक्रम भी चला रहे हैं।

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