खुशखबरी: चांद पर ISRO ने खोज निकाला विक्रम लैंडर, ऑर्बिटर ने भेजी थर्मल तस्वीर

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ISro k Sivan
ISRO चीफ के सिवन( Image Source- Social media)

इसरो को चांद पर विक्रम लैंडर की स्थिति का पता चल गया है। ऑर्बिटर ने थर्मल इमेज कैमरा से उसकी तस्वीर ली है। इसरो के वैज्ञानिकों को चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की लोकेशन मिल गई है। लैंडर विक्रम चांद की सतह पर अपनी निर्धारित लोकेशन से पांच सौ मीटर की दूरी पर दिखाई दिया है। हालांकि, उससे अभी कोई संचार स्थापित नहीं हो पाया है। यह जानकारी खुद इसरो अध्यक्ष के सिवन ने देशवासियों को दी है।

मीडिया खबरों के अनुसार, विक्रम लैंडर लैंडिंग वाली तय जगह से 500 मीटर दूर पड़ा है। चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे ऑप्टिकल हाई रिजोल्यूशन कैमरा (OHRC) ने विक्रम लैंडर की तस्वीर ली है। फिलहाल लैंडर से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है लेकिन उससे संपर्क करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। इसरो अध्यक्ष ने कहा कि जल्द ही लैंडर से संपर्क कर लिया जाएगा। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा।

फिलहाल इसरो वैज्ञानिक ऑर्बिटर के जरिए विक्रम लैंडर को संदेश भेजने की कोशिश कर रहे हैं ताकि, उसका कम्युनिकेशन सिस्टम ऑन किया जा सके। आपको बता दे, शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग के समय इसरो का लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया था। 13 मिनट 48 सेकेंड तक सारी प्रक्रिया इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार चल रही थी। अचानक से आखिरी के डेढ़ मिनट में इसरो के कंट्रोल रूम से इसका संपर्क टूट गया। जिसके बाद वैज्ञानिकों के चेहरे पर मायूसी छा गई थी।

चांद पर लैंडर विक्रम का पता चला- सिवन

इसरो प्रमुख के सिवन ने बताया कि हमें विक्रम लैंडर के बारे में पता चला है, वह चांद की सतह पर देखा गया है। ऑर्बिटर ने लैंडर की एक थर्मल पिक्चर ली है। लेकिन अभी तक कोई संचार स्थापित नहीं हो पाया है। हम संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। आपको बता दे, फिलहाल इसरो वैज्ञानिक ऑर्बिटर के जरिए विक्रम लैंडर को संदेश भेजने की कोशिश कर रहे हैं ताकि, उसका कम्युनिकेशन सिस्टम ऑन किया जा सके।

चंद्रयान मिशन २

प्रतीकात्मक फोटो (Source- Social media)

चंद्रयान 2 के लैंडर Vikram को 6-7 सितंबर की दरम्यानी रात चांद की सतह (Lunar Surface) पर लैंड होना था। हालांकि 2.1 किलोमीटर दूर ही धरती पर स्थित इसरो के स्टेशन से उसका संपर्क टूट गया। इसरो चीफ के. सिवन ने तब इसकी जानकारी देते हुए कहा था कि चंद्रयान 2 के ‘विक्रम’ लैंडर से संचार को शनिवार की तड़के लूनर सर्फेस पर पहुंचने से 2.1 किलोमीटर पहले संपर्क टूट गया और डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है।’

लैंडर विक्रम ने चांद से 30 किलोमीटर की दूरी पर अपने कक्ष से नीचे उतरते समय 10 मिनट तक सटीक रफब्रेकिंग हासिल की थी। इसकी गति 1680 मीटर प्रति सेकंड से 146 मीटर प्रति सेकंड हो चुका था। इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग ऐंड कमांड नेटवर्क केंद्र के स्क्रीन पर देखा गया कि विक्रम अपने तय पथ से थोड़ा हट गया और उसके बाद संपर्क टूट गया।

प्रतीकात्मक फोटो (Source- Social media)

इसरो बैज्ञानिक काफी देर तक लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश करते रहे लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ था। कुछ देर बाद के सिवन ने बयान जारी करते हुए बताया था कि चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले विक्रम लैंडर से हमारा संपर्क टूट गया। वैज्ञानिक फिलहाल आंकड़ों का अध्ययन करने में लगे हुए हैं। इसरो प्रमुख के सिवन ने शनिवार को चंद्रयान-2 मिशन को 95 फीसदी सफल बताया था।

डीडी न्यूज से बातचीत में सिवन ने कहा था कि विक्रम लैंडर से संपर्क करने की कोशिश जारी है। उन्होंने कहा था कि विक्रम लैंडर से दोबारा संपर्क बनाने के लिए प्रयास जारी हैं। हम अगले 14 दिन तक इसके लिए कोशिश करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि आखिरी चरण ठीक से पूरा नहीं किया जा सका, उसी चरण में हमने विक्रम से संपर्क खो दिया। चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर 7.5 साल तक काम कर सकता है।

ऑर्बिटर में लगे हुए हैं कैमरे

भविष्य में विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर कितना काम करेंगे, इसका तो डेटा एनालिसिस के बाद ही पता चलेगा। इसरो वैज्ञानिक अभी यह पता कर रहे हैं कि चांद की सतह से 2.1 किमी ऊंचाई पर विक्रम अपने तय मार्ग से क्यों भटका। इसकी एक वजह ये भी हो सकती है कि विक्रम लैंडर के साइड में लगे छोटे-छोटे 4 स्टीयरिंग इंजनों में से किसी एक ने काम न किया हो।

इसकी वजह से विक्रम लैंडर अपने तय मार्ग से डेविएट हो गया। यहीं से सारी समस्या शुरू हुई, इसलिए वैज्ञानिक इसी प्वांइट की स्टडी कर रहे हैं। आर्बिटर में SAR (सिंथेटिक अपर्चर रेडार), IR स्पेक्ट्रोमीटर और कैमरे की मदद से 10 x 10 किलोमीटर के इलाके को छाना जा सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक लैंडर विक्रम का पता लगाने के लिए उन्हें उस इलाके की हाई रेजॉलूशन तस्वीरें लेनी होंगी।

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