शिव का चमत्कारी मंदिर, जंहा शिव का अभिषेक करते ही नीला पड़ जाता है दूध, मिलते हैं ये संकेत

0
676
nagnath swamy mandir in kerala

भगवान भोलेनाथ के सबसे प्रिय महीने सावन में सभी शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है। पुरे भारतवर्ष में कई संख्या में शिवालय मौजूद है, जिनकी अपनी अपनी आध्यात्मिक और पौराणिक विशेषताएं उन्हें खास बनाती है। इन्हीं शिव मंदिरों में से एक शिव मंदिर केरल में स्थित है, जहां शिव भक्तों की लाइन लगी रहती है। वहां के चमत्कारों को देखने के लिए व शिवलिंग (shivling) के दर्शन करने के लिए। इस मंदिर के अंदर लोग शिवलिंग के चमत्कार के दर्शन के लिए आते हैं, क्योंकि इस मंदिर में जब शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है तो उस पर चढ़ाया जाने वाला दूध नीला पड़ जाता है।

जी हां, आपने विल्कुल सही पढ़ा। एक ऐसा चमत्कारिक शिव मंदिर, जहां पर शिवलिंग पर जो दूध अर्पित किया जाता है वह नीला हो जाता है। आज हम आपको जिस शिव मंदिर के बारे में जानकारी दे रहे हैं, यह शिव मंदिर केरल में स्थित है। यह चमत्कारिक शिवलिंग केरल के कीजापेरूमपल्लम गांव में कावेरी नदी के तट पर मौजूद है। जिसको नागनाथ स्वामी मंदिर के नाम से लोग जानते हैं, यहां पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए उपस्थित होते हैं।

ग्रहो की पूजा के लिए विश्वविख्यात

शिवजी के इस चमत्कारी शिवलिंग को लेकर कई किवदंतियां पुराणों से लेकर आम जन तक विघमान है। यही नहीं लोग यंहा मंदिर में ग्रह शांति (grah shanti ) की पूजा करवाने के लिए भी दूर-दूर से आते हैं। ग्रहों में केतु की पूजा (ketu puja) के लिए यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध माना जाता है, यहां आसपास ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से लोग पूजा करवाने आते हैं।

यहां मंदिर में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, इसके साथ ही केतु ग्रह की शांति और कुंडली में कालसर्प दोष होने पर भी इस मंदिर में विशेष पूजा की जाती है। लेकिन मंदिर में मुख्य देवता के रूप में भगवान शिव की ही पूजा की जाती है। केतु की पूजा के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर अद्भुत माना जाता है। यहां राहु-केतु शांति ( rahu-ketu ) के साथ ही कालसर्प दोष के लिए भी पूजा की जाती है।

राहु की मूर्ति पर सांप

केरल के इस प्रसिद्ध शिवालय के चमत्कार इसको अलौकिक और अद्भुत बनाते है। कहा जाता है, इस शिवालय में मौजूद राहु की पूर्ति पर सांप भी दिखाई देते हैं। उन्हें नागों का स्वामी माना जाता है। बता दे, धार्मिक मायताओ के आधार पर केतु को सांपो का देवता माना गया है। इस मंदिर की सबसे अद्भुत व चमत्कारी विशेषता ये है, की मंदिर के शिवलिंग पर चढ़ाये जाना बाला दूध, नीला हो जाता है। लेकिन ये सभी के साथ नहीं होता। मान्यता है कि जिन लोगों पर राहु-केतु का दोष होता है,सिर्फ उन्ही के साथ ऐसा होता है।

यहां पर आकर पूजा करने से केतु के समान कुंडली में मौजूद दोष समाप्त हो जाते हैं। सावन माह में यहां पर दर्शन करने वालों की संख्या देखते बनती है। दूध का रंग नीला हो जाने को लोग भगवान शिव का चमत्कार मानते हैं। लोगों की आस्था है कि दूध का रंग नीला करके भगवान शिव यह आश्वासन देते हैं कि कुंडली में दोष है और जो दोष था वह दूर हो गया है। इस लिए यंहा शिव भक्तो की लाखो में संख्या मौजूद रहती है।

मंदिर पौराणिक कथा

इस मंदिर को लेकर पूरे विश्वभर में कई किवदंतियां व चमत्कार प्रसिद्ध है। लेकिन पौराणिक आधार पर बताया जाता है, कि एक बार राहु को एक ऋषि ने नष्ट हो जाने का शाप दिया था और शाप से राहत पाने के लिए राहु अपने सभी गणों के साथ भगवान शिव की शरण में पहुंचे। सभी ने शिवजी की घोर तपस्या की। कई वर्षो उपरांत महादेव राहु की तपस्या से प्रशन्न हुए, तत्पश्चात उन्होंने यंहा राहु को दर्शन दिए।

मान्यता है, कि शिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान शिव राहु के सम्मुख प्रकट हुए और उन्हें ऋषि के शाप से मुक्ति का आशीर्वाद दिया। इसलिए इस मंदिर में राहु को उनके गणों के साथ दर्शाया गया है। उन्हें नागों का स्वामी माना जाता है। राहु का स्वरूप केवल मनुष्य जैसा सिर है। जबकि धड़ को केतु माना जाता है। दुनिया भर से यंहा लोग राहु व कालशर्प दोष से मुक्ति के लिए विशेष पूजा अर्चना करने के लिए आते है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here