गिरती अर्थव्यवस्था पर मनमोहन सिंह की सलाह मानना राष्ट्रहित में: शिवसेना

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ShivSena

देश में आर्थिक मंदी के हालात को लेकर शिवसेना (Shiv Sena) ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह (Former Prime Minister Manmohan Singh) के जरिए मोदी सरकार पर निशाना साधा है। शिवसेना (ShivSena) ने अपने मुखपत्र सामना (Samna) में ‘मौनी बाबा का धमाका!’ शीर्षक के साथ संपादकीय लिखकर वर्तमान अर्थव्यवस्था पर मनमोहन सिंह के बयान के बहाने मोदी सराकर का खराब होते आर्थिक हालातों की ओर ध्यान दिलाया है। इसी के साथ शिवसेना ने पूर्व प्रधानमंत्री के आर्थिक योगदान को याद कर उनकी तारीफ भी की।

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी शिवसेना ने देश में मौजूदा आर्थिक मंदी पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का समर्थन किया है, मनमोहन ने हाल ही में कहा था कि मोदी सरकार के कुप्रबंधन की वजह से अर्थव्यवस्था की स्थिति इतनी खराब हुई है। शिवसेना ने केंद्र सरकार को कहा कि मनमोहन सिंह की बात सुनना देशहित में है। शिवसेना ने सामना में लिखा है, ‘अनुच्छेद 370 हटाकर सरकार ने साहसी कदम आगे बढ़ाया और देश इसे लेकर प्रसन्न है।

परंतु कश्मीर और आर्थिक मंदी दो अलग विषय हैं। कश्मीर में विद्रोही सड़क पर उतरें तो उन्हें बंदूक के जोर पर पीछे ढकेला जा सकता है लेकिन आर्थिक मंदी पर बंदूक वैसे तानोगे? मंदी के कारण बेरोजगारी बढ़ेगी और लोग ‘भूख-भूख’ करते सड़क पर आएंगे तब उन्हें भी गोली मारोगे क्या? आर्थिक मंदी पर भक्त चाहे कितना भी उल्टा-पुल्टा कहें तब भी सच के मुर्गे ने बांग दे दी है और मौनी बाबा मनमोहन द्वारा सौम्य शब्दों में कहे गए सच से भी धमाका हो ही गया।

अर्थव्यवस्था में गिरावट चिंताजनक- शिवसेना

सामना में लिखा है, ”मनमोहन सिंह ने मंदी के संदर्भ में टिप्पणी की है तथा भविष्य में मुश्किलों भरे दौर का एहसास दिला दिया है, इससे चिंता और बढ़ गई है। अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है तथा भविष्य में धराशायी हो जाएगी, ऐसा जब मनमोहन सिंह कहते हैं तो इस पर विश्वास करना पड़ता है। 35 वर्षों से देश की अर्थव्यवस्था से उनका संबंध रहा है। बुरे दौर में भी उन्होंने अर्थव्यवस्था के लिए परिश्रम किया था, इसे स्वीकार करना होगा इसलिए आज की अर्थव्यवस्था में कुछ गलतियां दिखती होंगी तो मनमोहन को बोलने का अधिकार है।”

शिवसेना का वित्तमंत्री पर तंज

सामना ने लिखा, मनमोहन ने अब बेवजह मुंह नहीं खोला बल्कि प्रहार किया है। इतना ही नही मंदी को लेकर सामना में देश की पहली वित्तमंत्री पर भी निशाना साधा गया है।’ सामना में लिखा है, ‘नोटबंदी और जीएसटी जैसे निर्णय देश में आर्थिक मंदी की वजह बन रहे हैं, ऐसा मनमोहन सिंह कह रहे हैं। देश की विकास दर गिर रही है। उत्पादन क्षेत्र में बढ़ोत्तरी घट गई है तथा लाखों लोगों पर नौकरी गंवाने का संकट आ गया है। फिर भी यह हालात सरकार को भयावह नहीं लगते, ऐसी अवस्था हैरान करनेवाली है।

देश की पहली महिला रक्षा मंत्री सीतारमण की पहले सराहना हुई। देश की पहली महिला वित्त मंत्री के रूप में उन पर की गई पुष्पवर्षा के फूल अभी भी सूखे नहीं हैं। परंतु सक्षम महिला होना तथा देश की अर्थनीति को पटरी पर लाने में फर्क होता है। हमारी पहली महिला वित्त मंत्री को कहीं भी आर्थिक मंदी नजर नहीं आती तथा देश में सब कुशल-मंगल है, ऐसा उनका कहना है। आर्थिक ‘मंदी’ पर वह कई बार मौन ही बरतती हैं।

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