क्रूर समाज! बेटी रोती रही मगर सड़क पर बेसुध पड़ी रही मां, फिर JCB से पहुंचाया अस्पताल

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कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने भारत को तोड़ कर रख दिया है। इस दौरान जहां एक ओर भारत की आर्थिक स्थिति डगमगा रही है तो वहीं देश का हेल्थ सिस्टम भी पूरी तरह से वेंटिलेटर पर आ गया है। यही वजह है कि लोग अस्पताल में पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दे रहे हैं। वही जो लोग भर्ती हैं वह ऑक्सीजन की कमी के चलते दम तोड़ रहे हैं। मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या के चलते हालात यह हो गए हैं कि अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन दोनों की कमी हो गई है।

ताजा मामला कर्नाटक के कोलार शहर का है, जहां भारत के बद से बदतर होते हालातों की झलक नजर आई। यहां एक महिला अचानक से सड़क पर बेहोश होकर गिर गई। इसके बात कोरोना के डर से कोई भी आदमी उसे अपने वाहन में अस्पताल ले जाने को तैयार नहीं हुआ, जिसके बाद महिला को जेसीबी मशीन से अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद जब डॉक्टरों ने जांच की तो उसे मृत घोषित कर दिया।

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इस मामले पर जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक लोग महिला को अपने वाहन में ले जाने से डर रहे थे, क्योंकि उन्हें डर सता रहा था कि महिला कोरोना संक्रमित हो सकती है। लोगों ने इसी डर के चलते महिला की मदद नहीं की और उसकी मौत हो गई। महिला की उम्र 47 साल बताई जा रही है।

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गौरतलब है कि बुधवार की रात चंद्रकला(मृतक महिला) अपनी 12 साल की बेटी के साथ चिंतामणि के कुरुथहल्ली गांव पहुंची थी। यहा वह मजदूरी का काम करती थीं। चंद्रकला के बीमार होने पर दोनों घर लौट रहे थे, लेकिन वे रात गुजारने के लिए एक दुकान के बाहर बैठ गए। सुबह ग्रामीणों ने उन्हें कुछ खाने को दिया।

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महिला की हालत लगातार बिगड़ रही थी। ऐसे में वह अपनी लड़की की गोद में सिर रख कर सो गईं, लेकिन दोपहर के आसपास, जब चंद्रकला की बेटी ने उन्हें जगाने की कोशिश की तो वो बेसुध पड़ी थी और कोई प्रतिक्रिया हीं दे रही थी। मां की गंभीर हालत में देख बेटी रोती रही और मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन कोई भी महिला को अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इसके बाद, किसी तरह से जेसीबी मशीन आई और महिला को उससे अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि इन सब में देरी हो जाने के कारण महिला की मौत हो गई। वहीं महिला की जांच रिपोर्ट में पता चला कि वह कोरोना संक्रमित नहीं थी। महिला के दो बच्चे है जिनमें 12 साल की बेटी और एक 10 साल का बेटा है। पति के निधन के बाद से वह अकेले ही अपने बच्चों का पालन पोषण कर रही थी।

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