गुरुराज देशपांडे: जिन्होने अमेरिकी में रहते हुए किसानों के लिए 5 साल में बनवायें 6000 तालाब

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गुरुराज देशपांडे एक ऐसा नाम और एक ऐसी संस्था जो पिछले 5 सालों में लगभग 6000 से ज्यादा तालाब बनाने का काम कर चुकी है। देशपांडे फाउंडेशन के संस्थापक गुरुराज देशपांडे का कहना है कि उनका इन कामों के पीछे एक मात्र उद्देश्य देश किसानों को उन्नति और प्रगति की ओर ले जाना है। उनका उद्देश्य किसानों की आमदनी को बढ़ाना है।

Deshpande Foundation

गुरुराज देशपांडे का कहना है कि हमारा देश गांव का देश है इसलिए हमारा लक्ष्य देश की डिजिटल सेवा को हर गांव तक पहुंचाना है। अपनी इन्हीं सोच के साथ उन्होंने अपने इस सफर की शुरुआत की थी और अब तक वह 6000 से ज्यादा तालाब बनवा चुके हैं। उनका कहना है कि अगले फेस में ऐसे ही लगभग एक लाख तालाब बनाने के प्रोग्राम पर वो काम कर रहे हैं। बता दे लगभग 800 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का मकसद भी किसानों की मदद और उनकी आय को बढ़ाना ही है।

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बात गुरुराजा देशपांडे की करें तो बता दे देशपांडे फाउंडेशन के संस्थापक मशहूर गुरुराज देशपांडे एक भारतीय-अमेरिकी बिजनेसमैन और वेंचर कैपिटलिस्ट है। उन्होंने Sycamore Networks के नाम से अमेरिका के मैसाचुसेट्स में यह कंपनी शुरू की थी। उनकी कंपनी का काम इंटरनेट से जुड़े उपकरणों को मैन्युफैक्चर करना है।

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साथ ही दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित टेक इंस्टिट्यूट MIT में देशपांडे सेंटर फॉर इन्नोवेशन नाम का प्रोग्राम भी चलाते हैं। उनका मानना है कि देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों को डिजिटल सेवाओं के बारे में जानकारी होनी चाहिए और साथ ही उनसे जुड़ना भी चाहिए।

मालूम हो गुरुराज देशपांडे का जन्म कर्नाटक के हुबली में हुआ था। उनके पिता भारत सरकार में लेबर कमिश्नर हुआ करते थे। अपनी शुरुआती पढ़ाई उन्होंने यहीं से की थी। इसके बाद IIT मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद मास्टर की डिग्री के लिए वह कनाडा चले गए। कनाडा से ही उन्होंने अपनी पीएचडी की डिग्री हासिल की।

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पढ़ाई खत्म करने के बाद 80 के दशक में गुरुराज देशपांडे कोडेक्स कॉर्पोरेशन में काम करने लगे। बता दें यह कंपनी मोटोरोला का ही हिस्सा है। इसके बाद उन्होंने कोरल नेटवर्क की स्थापना की। बता दे यह कंपनी नेट सुविधा में यूज किए जाने वाले राउटर को बनाने का काम करती है।

साल 1998 में उन्होंने एमआईटी के शोधकर्ता के साथ मिलकर Sycamore Networks की शुरुआत की। यहीं से उनकी कामयाबी का असल सफर शुरू हुआ। एक साल के अंदर ही वह दुनिया भर में एक बिजनेसमैन के तौर पर पहचाने जाने लगे। दुनिया के सेल्फ मेड बिजनेसमैन की सूची में उनका नाम शामिल हो गया। इतना ही नहीं उस साल फॉर्ब्स मैगजीन ने भी उन्हें अमेरिका के 400 सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में जगह दी।

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गुरुराज देशपांडे और उनकी पत्नी जयश्री ने एमआईटी में 20 मिलियन डॉलर की लागत से देशपांडे सेंटर की शुरुआत की और इसका सफर आज तक जारी है। वह इसके सामाजिक आर्थिक उन्मूलन प्रोग्राम के जरिए लाखों लोगों की मदद करते हैं। इस संस्था की शुरुआत कर उन्होंने टेक्नोलॉजी की मदद से दुनिया को उसके लाभ और उसके बढ़ते स्तर के बारे में समझाया।

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उनकी इस संस्था का उद्देश्य टेक्नोलॉजी और इन्वेंशन के जरिए सामाजिक समस्याओं को हल करना है। देश के किसानों की समस्याओं का समाधान करने और उनके लिए एक लाख तालाब बनाने की सोच भी उनके इसी सेंटर का हिस्सा है। उनके इस सफर ने लाखों लोगों को लाभ पहुंचाया है, जिसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल है।

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