स्कूल ना होने के चलते बचपन में ही छोड़ना पड़ा घर-गांव, आज IAS अफसर बनकर लौटा बेटा, पढ़े पूरा सफर

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देश में सबसे ज्यादा IAS अधिकारी बिहार की जमीन से आते हैं, लेकिन आज भी अगर बिहार में शिक्षा के स्तर की बात की जाए तो आज भी बदहाली छाई हुई है। आज भी बिहार की शिक्षा का स्तर जस का तस है। ऐसे में आज हम बिहार के युवा IAS अधिकारी सुमित कुमार के जीवन की कहानी आपको बताने जा रहे हैं। साथ ही बताएंगे कि किस तरह उनका यह सफर सिर्फ उनके लिए ही नहीं बल्कि पूरे परिवार के लिए काफी मुश्किल भरा रहा है।

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8 साल की उम्र में घर छोड़ना पड़ा घर

सुमित मूल रूप से बिहार के जमुई जिले के सिकंदरा गांव के रहने वाले हैं। इनके पिता सुशांत वणवाल है, जो कि बेहद गरीब है। सुमित के पिता का बचपन से ही सपना था कि उनका बेटा एक बड़ा आदमी बने, लेकिन उनके गांव में शिक्षा की सुविधा नहीं थी। ऐसे में उन्होंने सुमित के भविष्य को संवारने के लिए उसे खुद से दूर कर दिया। सुमित को 8 साल की उम्र में घर छोड़ना पड़ा था ताकि उनका आने वाला भविष्य सुधर सके।

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आईटी कानपुर में हुआ सिलेक्शन

8 साल की उम्र में ही उन्हें अच्छी शिक्षा के लिए बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया। सुमित के माता-पिता ने जहां एक ओर अपने हिस्से में बच्चों की आगे की जिंदगी सवार के लिए संघर्ष लिखा, तो वहीं बच्चों की जिंदगी में भी माता-पिता से दूर रहने का फैसला किया। सुमित ने साल 2007 में मैट्रिक और साल 2009 में इंटर की परीक्षा पास की। इसके बाद साल 2009 में उनका सिलेक्शन आईटी कानपुर में हो गया। आईटी कानपुर से अपनी बी-टेक की पढ़ाई करने के बाद सुमित ने यूपीएससी करने का फैसला किया।

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इस पद से खुश नहीं थे सुमित

ऐसे में सुमित ने यूपीएससी परीक्षा का पहला अटेम्प्ट साल 2017 में किया। इस दौरान उनकी 493वीं रैंक आई और डिफेंस कैडर में नियुक्ति हुई। सुमित का मन इस पद पर रहकर काम करने का नहीं था। ऐसे में सुमित ने दोबारा इस परीक्षा को देने का फैसला किया। साल 2018 में उन्होंने दोबारा यूपीएससी की परीक्षा देकर ना सिर्फ अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि परिवार के हिस्से में भी एक नया इतिहास लिखा।

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जब रच दिया इतिहास

इस बार उन्होंने देश भर में 53 वी रैंक हासिल की। सुमित के जीवन का यह सफर 8 साल की उम्र से शुरू हुआ था। जब उनके माता-पिता ने उनके भविष्य के लिए उन्हें 8 साल की उम्र में बोर्डिंग स्कूल भेज दिया था। सुमित का कहना है कि जब गांव में शिक्षा की अच्छी व्यवस्था नहीं थी उस समय माता पिता ने खुद से दूर किया। तब गांव में किसी ने नहीं सोचा था कि मैं शहर जाकर एक आईएएस अधिकारी बनकर गांव लौटूंगा…

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गांव भर में खुशी की लहर

सुमित ने बताया कि जब गांव में यह खबर पहुंची कि सुमित आईएएस अफसर बन गया है तो पूरे गांव में जश्न का माहौल था। पूरा गांव खुशी से झूम कर उनके परिवार को बधाइयां देने आ रहा था। सुमित अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं। सुमित का कहना है कि वो जानते हैं कि उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई और उनके भविष्य के लिए कई कड़े फैसले लिए, जिसकी वजह से आज वह ये मुकाम हासिल कर पाये हैं।

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सुमित की सलाह

सुमित अपनी इस सफलता के सफर को लेकर कहते हैं कि इस परीक्षा के दौरान हर परीक्षार्थी को पेशेंस रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस सफर में कई बार सफलता मिलने में समय लगता है। कड़ी मेहनत और सही दिशा में प्रयास करने से देर में ही सही पर सफलता जरूर मिलती है। साथी इस परीक्षा के दौरान अपने सीनियर से मदद जरूर लेनी चाहिए, वह अपने अनुभवों के आधार पर आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं।

बता दे सुमित का एक छोटा भाई भी है, जो मौजूदा समय में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। उनके दोनों बच्चे माता-पिता की मेहनत और उनके संघर्ष का प्रतिफल है। दोनों के अच्छी जगह चयनित होने से उनके माता-पिता में सुकून है।

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