महज़ 5 रुपए मज़दूरी की खातिर खेतों में चलाया कुदाल, आज है 100 करोड़ एम्पायर की मालकिन

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एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी “जहा चाह है वहा राह है” मतलब अगर आपके अन्दर कुछ पाने या करने की इच्छा है तो रास्ते खुद ब खुद बन जाते हैं. ये कहानी भी ऐसी ही एक महिला की है जिसने मुश्किलों से ही सही पर खुद को दुनिया के नक्से पर रखा और खुद को साबित किया कि इरादे मजबूत हो तो जिंदगी का हर मुकाम हासिल किया जा सकता है.

हालात ने जीना सिखाया

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ये कहानी है अनिला ज्योति रेड्डी की जिन्होंने कभी 5 रुपये की मजदूरी पर खेतों में मज़दूरी की पर आज इनकी कंपनी ‘सॉफ्ट वेयर सॉल्यूशन इंक’ कई लोगों के लिए रोजगार का साधन बन गया है. आज इस कम्पनी की कुल किम्मत लगभग 100 करोड़ में है. लेकिन क्या आपको पता है ज्योति रेड्डी कितनी मेहनत से इतना बड़ा एम्पायर खड़ा किया था.

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दरअसल अनिला ज्योति रेड्डी का जन्म 1970 में तेलंगाना के एक बेहद गरीब परिवार में हुआ. माता पिता के साथ रेड्डी कुल तीन बहनें थी, जिनमे ये सबसे छोटी थी. पारिवारिक स्थिति इतनी ख़राब थी कि ज्योति रेड्डी को माता के रहते हुए एक अनाथालय में झूट बोल कर रहना पड़ा. उनकी पढाई भी इतनी सुचारू रूप से नहीं चल पाई. यहाँ तक उस दौरान उन्होंने बहुत मुश्किलों का सामना किया.

महज़ 16 साल की उम्र में अनिला ज्योति रेड्डी की शादी एक 24 साल के इन्सान से कर दी गई और सिर्फ 18 साल की उम्र में ही इनके दो बच्चे हो गए. बड़ी मुस्किल से परिवार का भरण पोषण हो रहा था. तब उन्होंने 5 रुपये की मजदूरी पर खेतों में काम करना शुरू किया. स्थिति बद से बद्त्तर होती जा रही रही थी लेकिन कहते हैं न जहा चाह है वही राह है.

हौसलें बुलंद हो तो रहे निकल आती हैं

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कुछ ही दिनों बाद रेड्डी ने नेहरू युवा केंद्र ज्वाइन किया और थोड़े ही दिनों बाद उनकी गिनती संस्थान के मुख्य लोगों शुरू होने लगी और केंद्र सरकार के एक बड़े मिशन की कमान इनके हाथों में सौपीं गई. इसी दौरान रेड्डी ने अपनी पढाई पर भी ध्यान केन्द्रित किया और साथ ही साथ कुछ कंप्यूटर की भी शिक्षा हासिल किया, स्थिति फिर भी सुधरने का नाम नहीं ले रही थी.

तब उन्होंने एक स्कूल में पढ़ाने का काम शुरू किया और महीने का लगभग 400 रुपये तनखाह हाशिल करने लगी. वो कहते है ना कभी कभी हालात भी बेरहम होने लगती है, स्कूल आने जाने में लगभग 4 घंटे का समय लग जाता था तो रेड्डी ने इस समय को सही ढंग से इस्तेमाल करना शुरू किया और रास्ते में ही साडी बेचना प्रारंभ किया.

और एक दिन वक़्त ने लिया करवट

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कुछ समय बाद ज्योति रेड्डी अपने एक कजिन के साथ अमेरिका चली गई और और वहा ढेर सारी नोकारियां की. नोकरी के दौरान अक्सर वो वीजा कंसल्टेंसी के चक्कर लगने लगी. जहा उन्होंने देखा की वीजा के लिए लोग बहुत भारी कमीशन तक देने को देने को तैयार हैं. तब उन्होंने खुद वीजा कंसल्टेंसी का काम शुरू किया.

फिर क्या वक़्त और किस्मत वही से करवट बदली और फिर तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चल पड़ी. कुछ ही दिनों में रेड्डी ने खुद की वीजा मामले में कंसल्टेंसी के लिए एक सॉफ्टवेर बनाया और देखते ही देखते उसे कंपनी का रूप दे दिया.

आज अमेरिका स्थित ज्योति की बनाई इस कंपनी सॉफ्टवेयर सॉल्युशंस के रिलायंस समेत कई बड़ी कंपनी क्लाइंट हैं. उनकी कंपनी की वैल्यू आज 100 करोड़ रुपए से भी अधिक मापी जाती है.

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