साल 2018 की टॉपर रहीं चाहत बाजपेयी ने दिए पास होने के टिप्स, UPSC में फेल होने वालों को मिलेगी 100% सफलता

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साल 2018 की टॉपर चाहत बाजपेयी, जिनकी 59वीं रैंक आयी थी। उन्होंने बताया कि कैसे प्रभावशाली तरीके से निबंध लिखा जाए। चाहत कहती हैं कि ऐस्से के लिए यह रवैया बिलकुल न अपनायें कि बाकी तैयारियां करते हैं, निबंध में क्या है, उसको एंड में देख लेंगे। कई बार कैंडिडेट्स को लगता है कि दो-तीन ऐस्से प्रैक्टिस करने से ही वे इसमें अच्छे अंक ला सकते हैं तो ऐसा कतई नहीं है। यह एक ऐसा विषय है जिसकी तैयारी आपको अलग से स्ट्रैटजी बनाकर करनी होगी। इसके साथ ही अगर आप अच्छा लिखते हैं या आपको पढ़ने में रुचि है तो भी ये न समझें कि आपके लिए निबंध लिखना बड़ी बात नहीं। सच तो यह है कि आप कैसे भी बैकग्राउंड के हों आपको ऐस्से के लिए उतनी ही मेहनत करनी होगी जितनी किसी और को।

यूपीएससी परीक्षा का दायरा यूं तो बहुत बड़ा होता है और निबंध लेखन उसका एक छोटा सा हिस्सा मात्र है पर विशेषज्ञों की मानें तो इस पेपर को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह पेपर इस बात में अहम भूमिका निभाता है कि आपको चयन के बाद कौन सी सर्विस मिलेगी। कुल मिलाकर इस पेपर की आपकी रैंक सुधारने में अहम भूमिका होती है। निंबध के महत्व को देखते हुए आज हम इसी विषय पर बात करेंगे जो upsc कैंडिडेट्स के काम आएगा।

चाहत बताती हैं कि पहले उन्हें लगता था कि जो लोग ब्लॉग या अखबार के लिए लिखते हैं या जो इंग्लिश लिटरेचर के स्टूडेंट्स होते हैं, वे ही अच्छा निबंध लिख सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। यूपीएससी के निबंध के लिए सभी को अलग से तैयारी करनी ही पड़ती है, इस बात को समझते हुए कि यूपीएससी के ऐस्से में आखिर क्या और कैसे लिखा जाता है।

चाहत कहती हैं कि यूं तो सबका अपना लिखने का तरीका होता है पर अगर उनके व्यक्तिगत अनुभव की बात करें तो वे टॉपर अनु कुमारी की बात मानते हुए ऐस्से लिखती थी जिसमें उन्होंने कहा था कि ऐस्से पानी पीने जैसा होना चाहिए। यानी इतना सरल जिसे पानी की तरह एक बार में पिया जा सके, कहीं रुकना न पड़े न कहीं कुछ ऐसा हो जो समझ न आये, जो पानी की तरह बह जाए।

चाहत दूसरा अहम बिंदु मानती हैं निबंध में कविता या कोट्स का इस्तेमाल। वे कहती हैं उन्होंने ऐसे बहुत से कॉमन कोट्स आदि तैयार कर रखे थे जो निबंध में डाले जा सकें पर एक बात का ध्यान यहां रखें कि चूंकि आपने इन्हें तैयार कर लिया है इसका मतलब यह नहीं कि आप जबरदस्ती इन्हें डालें ही। जहां उचित हो केवल वहीं इनका प्रयोग करें।

इसके साथ ही अगला जरूरी प्वॉइंट है निबंध के विषय के हिसाब से राइटिंग स्टाइल का चुनाव करना। जैसे कोई निबंध पास्ट, प्रेजेंट और फ्यूचर स्टाइल में लिखना ठीक रहता है तो कोई पास्ट, प्रेजेंट सिचुएशन, प्रॉब्लम्स, सॉल्यूशन मोड में। देख लें कि आपका विषय किस तरह से अच्छे से एक्सप्रेस किया जा सकता है, उसी तरीके को आपनाएं।

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