90फीसदी मुस्लिम आबादी वाला ये देश है ‘प्रभु राम का भक्त; यंहा के लोग मनाते हैं रामलीला उत्सव

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Indonesia Ramayana Utsav

दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया के लिए रामकथा यानी रामायण एक बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इंडोनेशिया अपनी साझी संस्कृति के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। इंडोनेशिया के बाली द्वीप में हिंदू बहुसंख्यक हैं। इस देश में अयोध्या भी है और यहां के मुस्लिम भी भगवान राम को अपने जीवन का नायक और रामायण को अपने दिल के सबसे करीब किताब मानते हैं।

आबादी के लिहाज से इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है पर यहां हिन्दू संस्कृति का असर काफ़ी प्रभावशाली है। जिस प्रकार भारत में रामलीला पसंद की जाती है, ठीक उसी प्रकार इंडोनेशिया में भी रामलीला होती हैं। यहां श्रीराम को मानने वाले काफी लोग हैं। इंडोनेशिया में रामायण काकाविन ग्रंथ के आधार पर रामलीला होती है। यहां की रामलीला दुनियाभर में प्रसिद्ध है।

भारत और इंडोनेशिया के बीच रिश्ते

भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते हज़ारों साल पुराने हैं। ईसा के जन्म से पहले से ही भारत के सौदागर और नाविक वहां जाते रहे हैं। यही कारण है कि इंडोनेशिया और भारत में काफ़ी सारी सांस्कृतिक समानताएं देखने को मिलती हैं। प्राचीन काल से ही भारतीय सौदागर और नाविकों के आने-जाने के कारण इंडोनेशिया में न सिर्फ़ हिंदू धर्म बल्कि बौद्ध धर्म का भी गहरा प्रभाव नज़र आता है।

इंडोनेशियाई भाषा, स्थापत्य, राजशाही और मिथकों पर भी इन धर्मों का असर है। उदाहरण के लिए इंडोनेशिया के पुराने साम्राज्यों के नाम श्रीविजया और गजाह मधा आदि हैं। यही नहीं, भाषा के मामले में भी कई समानताए हैं। उनकी भाषा को ‘बहासा इंदोनेसिया’ कहते हैं। उनकी भाषा पर संस्कृत का खासा प्रभाव रहा है। उदाहरण के लिए मेघावती सुकार्णोपुत्री, जो कि इंडोनेशिया की पांचवीं राष्ट्रपति रही हैं।

इंडोनेशिया की रामायण और राम

इंडोनेशिया में अगर आप महाभारत और रामायण का ज़िक्र करेंगे तो वे कहेंगे कि ये तो हमारे ग्रंथ हैं। वहां के उत्सवों और झांकियों आदि में में इन ग्रंथों के पात्र कठपुतलियों के रूप में नज़र आ जाते हैं। जैसे कि वहां चमड़े की कठपुतलियों के शो में ऐसे ही कुछ विचित्र पौराणिक पात्र देखने को मिलते हैं। कहीं, कौरवों में से विचित्र हीरो निकल आता है तो कहीं हनुमान नज़र आ जाते हैं। उनके रामायण या महाभारत के कुछ प्रसंग भिन्न होते हैं, मगर कथानक वही रहता है।

साल 1973 में यहां सरकार ने अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मलेन का आयोजन भी किया था। ये अपने आप में काफी अनूठा आयोजन था, क्योंकि घोषित रूप से कोई मुस्लिम राष्ट्र पहली बार किसी अन्य धर्म के धर्मग्रन्थ के सम्मान में इस तरह का कोई आयोजन कर रहा था। इंडोनेशिया में आज भी रामायण का इतना गहरा प्रभाव है कि देश के कई इलाकों में रामायण के अवशेष और पत्थरों तक की नक्‍काशी पर रामकथा के चित्र आसानी से मिल जाते हैं।

भारत और इंडोनेशिया की रामायण में थोड़ा अंतर है। भारत में राम की नगरी जहां अयोध्या है, वहीं इंडोनेशिया में यह योग्या के नाम से स्थित है। यहां राम कथा को ककनिन, या काकावीन रामायण नाम से जाना जाता है। यहां राम कथा को ककनिन, या ‘काकावीन रामायण’ नाम से जाना जाता है। भारतीय प्राचीन सांस्कृतिक रामायण के रचियता आदिकवि ऋषि वाल्मिकी हैं, तो वहीं इंडोनेशिया में इसके रचयि‍ता कवि योगेश्वर हैं।

इंडोनेशिया की रामायण एक विशाल ग्रंथ है

इंडोनेशिया की रामायण 26 अध्यायों का एक विशाल ग्रंथ है। इस रामायण में प्राचीन लोकप्रिय चरित्र दशरथ को विश्वरंजन कहा गया है, जबकि उसमें उन्‍हें एक शैव भी माना गया है, यानी की वे शिव के अराधक हैं। इंडोनेशिया की रामायण का आरंभ भगवान राम के जन्म से होता है, जबकि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण के प्रस्थान में समस्त ॠषिगणों की ओर से मंगलाचरण किया जाता है और दशरथ के घर इस ज्येष्ठ पुत्र के जन्म के साथ ही हिंदेशिया का वाद्य यंत्र गामलान बजने लगता है।

इंडोनेशिया की रामायण में नौसेना के अध्यक्ष को लक्ष्मण कहा जाता है, जबकि सीता को सिंता कहते हैं। हनुमान तो इंडोनेशिया के सर्वाधिक लोकप्रिय पात्र हैं। हनुमान की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी हर साल इस मुस्लिम आबादी वाले देश के आजादी के जश्न के दिन यानी की 27 दिसंबर को बड़ी तादाद में राजधानी जकार्ता की सड़कों पर युवा हनुमान का वेश धारण कर सरकारी परेड में शामिल होते हैं। बता दें कि हनुमान को इंडोनेशिया में ‘अनोमान’ कहा जाता है।

इंडोनेशिया में प्रचलित रामायण की कुछ खास बातें-

इंडोनेशिया में रामायण काकावीन नाम का ग्रंथ प्रचलित है। ये बहुत पुराना ग्रंथ है। रामायण काकावीन की रचना कावी भाषा में हुई है। यह इंडोनेशिया के जावा की प्राचीन भाषा है। काकावीन का अर्थ महाकाव्य है। कावी भाषा में कई महाकाव्यों की रचना हुई है। इनमें रामायण काकावीन प्रमुख है। रामायण काकावीन छब्बीस अध्यायों का एक विशाल ग्रंथ है। रामायण काकावीन की आरंभ श्रीराम के जन्म से होता है। ग्रंथ में आगे विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण का प्रस्थान है। दशरथ के राज प्रसाद में हिंदेशिया का वाद्य यंत्र गामलान बजता है।

दूसरे अध्याय के आरंभ बसंत का वर्णन है। इसमें इंडोनेशायाई परिवेश के बारे में लिखा गया है। विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण की यात्रा और हिंदेशिया की प्रकृति का वर्णन है। विश्वामित्र के आश्रम में दोनों राजकुमारों को युद्ध और ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा दी। ताड़का वध किया। इसके बाद मिथिला गमन, धनुष तोड़ना और राम-सीता विवाह का वर्णन है। इस ग्रंथ के अनुसार देवी सीता का जिस समय जन्म हुआ, उस समय पहले से ही उनके हाथ में एक धनुष था। वह भगवान शिव का धनुष था और उसी से त्रिपुर राक्षस का संहार हुआ था।

रामायण काकावीन ग्रंथ में परशुराम का आगमन, विवाह के बाद अयोध्या लौटने का वर्णन है। इस महाकाव्य में श्रीराम के अतिरिक्त उनके अन्य भाइयों के विवाह की चर्चा नहीं है। इसके बाद श्रीराम राज्यभिषेक की तैयारी, कैकेयी कोप, श्रीराम का वनवास, राजा दशरथ की मृत्यु और भरत के अयोध्या आगमन आदि घटनाओं का वर्णन है। भरत श्रीराम से मिलने वन में जाते हैं। अयोध्या लौटने से पहले श्रीराम भरत को अपनी चरण पादुका देते हैं। रामायण काकावीन में शूर्पणखा का प्रसंग से सीता हरण तक की घटनाएं वाल्मीकीय रामायण की तरह ही हुआ है।

इस रामायण के अनुसार ॠष्यसूक पर्वत पर श्रीराम की भेंट शबरी से होती है। शबरी श्रीराम को सीता की प्राप्ति के लिए सुग्रीव से मित्रता करने की सलाह देती है। इसके बाद सुग्रीव मिलन और बालिवध की घटनाएं होती हैं। सीता की खोज, राम-रावण युद्ध का इस महाकाव्य में विस्तृत वर्णन हुआ है।

रावण वध और विभीषण के राज्याभिषेक के बाद श्रीराम हनुमान से काले-काले बादलों को भेदकर आकाश मार्ग से अयोध्या जाने का आग्रह करते हैं। श्रीराम हनुमान से अयोध्या पहुंचकर माता कौशल्या और भरत से लंका विजय के साथ अपने आगमन का संदेश देने के लिए कहते हैं। श्रीराम अयोध्या पहुंचते हैं और श्रीराम का राज्योभिषेक होता है।

इस्लाम भी भारत के रास्ते पहुंचा

इंडोनेशिया सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है। मगर यहां पर इस्लाम भी भारत के पूर्वी तट से होता हुआ पहुंचा है। यही कारण है कि इंडोनेशिया और दक्षिण एशिया, ख़ासकर भारत के इस्लाम में कुछ समय पहले तक समानता रही है। दोनों की जगहों का इस्लाम सूफ़ीवाद से प्रभावित उदार और मानवीय परंपराओं को मानने वाला रहा है। मगर पिछले कुछ समय से इंडोनेशिया में कट्टरपंथ बढ़ा है।

पिछले साल ही इंडोनेशिया सरकार ने भारत के कई जगहों पर इंडोनेशिया की रामायण पर आधारित रामलीला का मंचन करवाने की मांग की थी। इंडोनेशिया के शिक्षा और संस्कृरति मंत्री अनीस बास्वेदन भारत आए थे और उन्होंइने भारतीय संस्कृाति मंत्री महेश शर्मा से मुलाकात कर यह कहा कि इंडोनेशिया चाहता है कि वह साल में कम से कम दो बार भारत में अपने यहां प्रचलित रामायण का भारत के कई शहरों में मंचन करे।

इंडोनेशिया में हिंदू-बौद्ध संस्कृति का प्रभाव

सातवीं सदी में व्यापार के कारण इंडोनेशिया में शक्तिशाली श्रीविजया साम्राज्य पनपा। इस साम्राज्य पर हिंदू और बौद्ध धर्म का भी प्रभाव था, जो व्यापारियों के कारण आया था। आठवीं और 10वीं सदी में जावा में कृषक बौद्ध सैलेंद्र और हिंदू मतारम वंश फले फूले। इसी काल में जावा मे हिंदू-बौद्ध कला और स्थापत्य की पुनर्स्थापना हुई थी। इस काल में बने कई स्मारक आज भी इंडोनेशिया में देखने को मिलते हैं। 13वीं सदी के आख़िर में पूर्वी जावा में हिंदू मजापहित साम्राज्य की स्थापना हुई थी। गजाह मधा के अधीन इसके प्रभाव का विस्तार उस क्षेत्र में हुआ जो आज इंडोनेशिया है।

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