पिता के अंतिम संस्कार के लिए बेटी लगाती रही मदद की गुहार…अपनों ने छोड़ा साथ, आजाद ने की मदद

0
285
Image Credit/Source: Amar Ujala

उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शहर गोरखपुर से एक बेहद मार्मिक खबर सामने आई है, जिसे जिसने भी सुना उसके आंसू निकल आये क्यूंकि अब ऐसा लगने लगा है जैसे इंसानियत लोगो के अंदर मर सी गई है।

जिले के पादरी बाजार के 70 वर्षीय मटरू को क्या पता था कि मरने के बाद उनके शव को कफन भी पहनाने तक कोई नहीं आएगा। उनकी बेटी शव के पास रोती-बिलखती रही लेकिन एक पडोशी तक उसको सांत्वना देने नहीं आया।

तभी इन सबके बीच एक अनजान इंसान जिसका नाम है- ‘आजाद पांडेय’ बह फरिश्ता बनकर उनके घर पहुँचता है और बेटे की तरह पूरा क्रिया कर्म कर मटरू को अंतिम बिदाई दिलवाता है।

आजाद पांडेय व उनकी टीम ने न सिर्फ कफन का इंतजाम किया, बल्कि अंतिम संस्कार भी किया। संवेदनहीनता की हद तब पार हो गई जब शव को कंधा देने न कोई रिश्तेदार पहुंचता न ही कोई पड़ोसी। 

परिवार के लिए फरिस्ता बने ‘आजाद पांडेय’

मीडिया संस्थान अमर उजाला की एक खबर अनुसार, गोरखपुर जिले के पादरी बाजार में रहने बाले मटरू लाल अपनी बेटी के साथ रहते थे। बेटी के पति का बहुत पहले ही निधन हो चूका था इसलिए बेटी भी उनके साथ ही रहती थी। मटरू बीमार थे और घर पर ही अचानक बेहोश हो गए। कुछ देर में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

पड़ोसियों ने मोड़ा मुंह

जो पडोसी हमेशा सुख दुःख के साथी कहे जाते है, उन्ही पड़ोसियों ने मटरू के अंतिम समय उनसे मुंह मोड़ लिया। पिता की मौत के बाद बेटी रोती-चिल्लाती मदद के गुहार लगाती रही लेकिन पत्थर दिल पड़ोसियों को दया तक नहीं आई और उसे उसके हाल पर छोड़ तमाशबीन बन तमासा देखते रहे। दरअसल, लोगों को आशंका थी कि मटरू कोरोना संक्रमित थे।

हालाँकि बेटी परिवार में अकेली बची थी, ऐसे में बह कैसे अंतिम संस्कार का पूरा बंदोबस्त करती यह एक बड़ा सवाल उठ रहा था। लेकिन तभी ईल रोटी बैंक के आजाद पांडेय किसी फरिश्ता की तरह उनके घर पहुँच जाते है।

आजाद अपनी टीम के साथ घर पहुंचे। पहले उन्होंने कफन खरीद कर मंगवाया और उसके बाद तख्ती बनवाकर लाए। शव को खुद उठाकर गाड़ी में रखा और श्मशान घाट ले गए। और विधि पूर्वक सम्मान के साथ मटरू को अंतिम विदाई दी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here