Ganesh Chaturthi: जाने इस बार कब मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी? क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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ganesh chaturthi 2019

भारत में कुछ त्यौहार धार्मिक पहचान के साथ-साथ क्षेत्र विशेष की संस्कृति के परिचायक भी हैं। इन त्यौहारों में किसी न किसी रूप में प्रत्येक धर्म के लोग शामिल रहते हैं। इसी प्रकार पुरे देश भर में गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) का महापर्व बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। भगवान श्री गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है। यह अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं, विघ्नहर्ता गणेश (Lord Ganesha) सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय है, कोई भी शुभ कार्य किया जाता है तो सबसे पहले भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश जी की आराधना करने से भक्तों के सभी विघ्न दूर होते हैं।

गणेश चतुर्थी अर्थात गणेश जन्मोत्सव। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। हर साल भाद्रपद मास में गणेश चतुर्थी मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग खासतौर पर गणेश भगवान की पूजा करते हैं। महिला और पुरुष दोनों समान रूप से इस दिन व्रत रख पुरे विधि विधान के साथ मंगलमूर्ति गणेश का पूजन कर पुण्य लाभ कमाते है। और आश्रीवाद स्वरुप गजानन सभी भक्तो के कस्ट हर उन्हें सुखी जीवन प्रदान करते है। इस साल गणेश चतुर्थी सितंबर माह में है, जिसको लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं गणेश चतुर्थी की किस तरह तैयारी करें, क्या शुभ मूहर्त है।

गणपति की स्थापना और पूजन का शुभ मुहूर्त

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से भाद्रपद चतुर्दशी तक यानी गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्थी तक भगवान गणेश जी की विशेष पूजा आराधना की जाती है और भगवान गणेश जी की स्थापना गणेश चतुर्थी के दिन होती है। इस साल गणेश चतुर्थी 2 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इस खास दिन पर पूजन का शुभ मूहर्त दोपहर 11 बजकर 4 मिनट से 1 बजकर 37 मिनट तक है। पूजा का शुभ मूहर्त करीब दो घंटे 32 मिनट की अवधि है। भादो मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार व शास्त्रों के कथानुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को दिन मध्याह्र काल में, स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में हुआ था। अगर धर्म शास्त्रों समय के अनुसार देखें तो सूर्य उदय से सूर्यास्त के बीच की अवधि को पांच समान भागों में बांटा गया है, भगवान गणेश जी की चतुर्थी पर गणेश जी की स्थापना और इनकी पूजा दिन के मध्य भाग में की जानी चाहिए। इसी कारण मध्याह्र काल में ही भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसे बहुत शुभ माना गया है।

कब से कब तक मनाया जाता है गणेशोत्सव

Lord Ganesha Puja Vidhi

भारतीय पुराणों में गणेश जी को विद्या-बुद्धि का प्रदाता, विघ्न-विनाशक और मंगलकारी बताया गया है। हर माह के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत किया जाता है। महाराष्ट्र में यह त्योहार गणेशोत्सव के तौर पर मनाया जाता है। ये दस दिन तक त्योहार चलता है और अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है। इस दौरान गणेश की भव्य पूजा की जाती है। लोग अपने घरों में भी इस मौके पर गणेश जी की प्रतिमा का स्थापना करते हैं।

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से गणेश जी का उत्सव गणपति प्रतिमा की स्थापना कर उनकी पूजा से आरंभ होता है और लगातार दस दिनों तक घर में रखकर अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की विदाई की जाती है। इस दिन ढोल नगाड़े बजाते हुए, नाचते गाते हुए गणेश प्रतिमा को विसर्जन के लिये ले जाया जाता है। विसर्जन के साथ ही गणेशोत्सव की समाप्ति होती है।

ऐसे करें गणेश चतुर्थी पूजा

Lord Ganesha Puja Vidhi

गणेश चतुर्थी के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है। यह प्रतिमा सोने, तांबे, मिट्टी या गाय के गोबर से अपने सामर्थ्य के अनुसार बनाई जा सकती है। इसके पश्चात एक कोरा कलश लेकर उसमें जल भरकर उसे कोरे कपड़े से बांधा जाता है। तत्पश्चात इस पर गणेश प्रतिमा की स्थापना की जाती है। इसके बाद प्रतिमा पर सिंदूर चढ़ाकर षोडशोपचार कर उसका पूजन किया जाता है।

गणेश जी को दक्षिणा अर्पित कर उन्हें 21 लड्डूओं का भोग लगाया जाता है। गणेश प्रतिमा के पास पांच लड्डू रखकर बाकि ब्राह्मणों में बांट दिये जाते हैं। गणेश जी की पूजा सांय के समय करनी चाहिये। पूजा के पश्चात दृष्टि नीची रखते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिये। इसके पश्चात ब्राह्मणों को भोजन करवाकर उन्हें दक्षिणा भी दी जाती है।

मंत्र-
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

गणेश चतुर्थी पर बरतें यह विशेष सावधानियां

Lunar Eclipse 2019

विघ्नहर्ता के जन्मोत्सव यानी गणेश चतुर्थी के समय कुछ विशेष सावधानी रखना परम आवशयक माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यानी गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन भूलकर भी ना करे। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन चंद्र दर्शन करने पर कलंक लग जाता है। इसका पूर्ण वर्णन धर्म शास्त्रों में विघमान है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, आर ब्यक्ति गणेश चतुर्थी के पर्व पर चंद्र के दर्शन करता हैं, तो उसको दोष यानी कलंक लगता है। क्योंकि भगवान श्री कृष्ण जी पर स्यमन्तक नामक बहुमूल्य मणि की चोरी का कलंक इस चंद्र के दर्शन करने की वजह से ही लगा था, इसलिए आप इस बात का ध्यान अवश्य रखें। और चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचे।

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