इंसाफ: नाबालिग ने भूखी मां के लिए की चोरी, जज ने गलती माफ कर सभी सुविधाएँ देने के दिया निर्देश

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कोरोना वायरस की महामारी से पूरा देश लड़ रहा है, वंही कुछ लोग ऐसे भी है जो भूख और तंगहाली से भी लड़ रहे है। महामारी की बजह से देशभर में लॉकडाउन जारी है, जिसकी बजह से तमाम उद्योग-धंधे बंद पड़े है। जिसकी सबसे ज्यादा मार देश के गरीब, मजदूर वर्ग पर पड़ा है। लोग दो बक्त के भोजन के लिए भी तरस रहे है। लेकिन संकट के इस काल में भी समाज का एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो इन गरीबों की मदद के लिए आगे आ रहा है और उन्हें खाना मुहैया करा रहा है।

पेट की भूख का आलम ये है कि लोग चोरी तक करने के लिए मजबूर हैं। ऐसा ही एक मामला बिहार के नालंदा में देखने को मिला, जंहा एक लड़के को अपनी भूखी माँ की हालत देखी नहीं गयी और बह चोरी करने तक के लिए मजबूर हो गया। चोरी के बाद लड़के को गिरफ्तार कर जज के सामने पेस किया गया। जिसके बाद जज ने सजा की जगह दिया ऐसा फैसला, जिसकी तारीफ पूरा गांव कर रहा है।

खबर विस्तार

मीडिया खबरों के अनुसार मामला बिहार के नालंदा जिले का बताया जा रहा है। शुक्रवार को यहां के बिहारशरीफ में चोरी के आरोप में एक नाबालिग को किशोर न्यायालय में पेश किया गया। जंहा उसने बताया कि उसने भूख से तड़पती माँ के लिए चोरी करने का फैसला किया था। जज को उस पर दया आयी और सजा देने की बजाय राशन और उसकी विक्षिप्त मां लिए कपड़े दिलाए।

बताया जा रहा है, कि पिछले दिनों हुई एक चोरी के मामले में नाबालिग को गिरफ्तार कर जज मानवेंद्र मिश्र की कोर्ट में पेश किया गया था। जिसके बाद उन्होंने किशोर की पूरी बात सुनी और उसकी मज़बूरी को समझा। किशोर की मज़बूरी को समझते हुए जज साहब ने उसे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया साथ ही अधिकारियों को उसे हर संभव मदद और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ देने का आदेश दिया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा- कि हर 4 महीने में किशोर से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट पुलिस अदालत को सौंपेंगी। इसके साथ ही जज साहब ने बीडीओ को परिवार को राशन कार्ड, सभी सदस्यों के आधार कार्ड, किशोर की मां को विधवा पेंशन, गृह निर्माण के लिए अनुदान राशि समेत सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कराने के लिए कहा है।

किशोर के नहीं है पिता, माँ विक्षिप्त

मीडिया खबरों के अनुसार, किशोर के पिता की कुछ साल पहले मौत हो चुकी है। इसके बाद उसकी माँ विक्षिप्त हो गई। इसके बाद अब परिवार की जिम्मेदारी इसी नावालिग बेटे पर है, आप इस बात से अंदाजा लगा सकते है कि मां की स्थिति ऐसी है कि वह पूरी तरह से बेटे पर निर्भर है। नावालिग के एक छोटा भाई भी है, लेकिन बह अभी क्या जिम्मेदारी उठा सकता है इस बात का अंदाजा भी लगाया जा सकता है।

परिवार की माली हालत दयनीय है, एक झोपड़ीनुमा घर में परिवार रहता है। भरण पोषण के लिए कोई स्थाई साधन नहीं जिससे खाने पीने का संकट भी बना रहता है। लॉकडाउन की बजह से स्थिति और भी बद से बदत्तर हो गई। जिसकी बजह से जज को उस पर दया आई और उन्होंने उसकी मदद की।

सारांश

जज साहब का कार्य काफी सराहनीय है, लेकिन किशोर की स्थिति देख दयनीय भाव के साथ साथ समाज पर भी सवाल खड़े हो जाते है। हमारे बीच आज भी कई ऐसे लोग मौजूद है जिनको हमारी जरूरत है, जिनको हमारी दया से ज्यादा हमारे साथ की जरुरत है। जिनको इस लॉकडाउन में खाने की जरुरत है, जिनको जरुरत है हमारे अहसास की कृपया ऐसे लोगो की मदद जरूर करे।

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