पिछले 2 माह से लॉकडाउन में 23 वर्षीय यह युवक 500 से अधिक जरुरतमंद बच्चों का भर चुका है पेट

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निलेश सिंह

जिंदा रहने के लिए हर घड़ी जंग लड़ रहे इन बच्चों को किसी का सहारा नही है। सरकारें केवल मदद का दावा करती रह गईं पर हकीकत तो यह है कि बच्चे बिना अन्न के भूखे हैं बच्चों के पेट खाली हैं। जब कहीं से कोई मदद नही मिली तो इन बच्चो के मदद के लिए आम लोगो ने पहल की, इन्हीं लोगो मे से एक है नीलेश सिंह।

नीलेश उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाले हैं, 23 वर्ष के नीलेश सिंह अपने परिवार की मदद से पिछले दो महीने से रोज जरूरतमंद बच्चों को एक वक्त का खाना बना कर बाँट रहे हैं। बातचीत के दौरान नीलेश ने बताया कि उनके और उनकी NGO के लिए यह आसान नही था वो और उनकी टीम बहुत समय से बच्चों की सहायता करते आये हैं, पर इस बार कोरोना महामारी के कारण यह स्थितियाँ एकदम अलग थीं। किसी भी नियम का उल्लंघन किये बिना बच्चों को मदद भी पहचानी थी, जो कि खुद में एक बड़ी चुनौती थी।

कोरोना के समय में कहीं बाहर से मदद न लेकर नीलेश ने अपनी परिवार की मदद लेना ही बेहतर समझा, सबसे पहले उन्होंने उन जगहों को चिन्हित किया जहां ज्यादा बच्चे इकट्ठा होते थे, इसके बाद उन्होंने अपना बजट तैयार किया। अपने बजट के हिसाब से वे रोजाना 500 बच्चों को ही एक समय का भोजन उपलब्ध करवा सकते थे, जोकि उन्होंने किया। अफसोस जताते हुए नीलेश ने यह भी कहा कि उनके पास पैसे सीमित है।

अगर उनके पास और पैसे होते तो वे और बच्चों के पेट करने की कोशिश करते। नीलेश की यह मुहिम लॉक डाउन के चारों चरणों मे जारी रही है। एक रिपार्ट का हवाला देते हुए नीलेश यह भी बताते हैं कि भारत मे करीब 50 फीसदी बच्चे कुपोषण की समस्या का शिकार हैं, यह समस्या बहुत बड़ी है। एक शोध के मुताबिक आने वाले छह महीनों में देश के 3 लाख बच्चों की मौत केवल कुपोषण के कारण हो सकती है।

निलेश कहते हैं कि उनका मकसद केवल बच्चों तक खाना पहुँचाना नही था, बल्कि बच्चों को एक संतुलित डाइट कैसे माइक उन्हें यह भी ध्यान रखना था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने खाने में केला दूध भी बांटना शुरू किया। नीलेश के अनुसार वह अपने जनपद इटावा के मोहोबा विकास खंड में लगभग 2300 बच्चों को कुपोषण से मुक्त करवा चुके हैं। अब वे गाजियाबाद के बच्चों के लिए काम करना चाहते हैं, जिसके लिए वे और उनकी NGO प्रतिबद्ध है। अभी वर्तमान में करीब 500 कुपोषित बच्चे उनके पास पंजीकृत हैं।

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